सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अभद्रता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Nov 2014 12:29 AM (IST)
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भारत में आये दिन पर्व-त्योहार के नाम पर मनोरंजन के लिए ऑर्केस्ट्रा और नाच-गानों का आयोजन किया जाता है, लेकिन इसमें मनोरंजन के नाम पर ईलता और अभद्रता की भरमार अधिक होती है. इससे हमारे गांव-समाज के बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. बच्चे भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उपयोग होनेवाली ईल गतिविधियों की नकल […]
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भारत में आये दिन पर्व-त्योहार के नाम पर मनोरंजन के लिए ऑर्केस्ट्रा और नाच-गानों का आयोजन किया जाता है, लेकिन इसमें मनोरंजन के नाम पर ईलता और अभद्रता की भरमार अधिक होती है. इससे हमारे गांव-समाज के बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. बच्चे भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उपयोग होनेवाली ईल गतिविधियों की नकल अपने घरों में करते हैं, जिससे सामाजिक संस्कृति प्रभावित हो रही है.
आज की तारीख में पुत्र अपने पिता का, छात्र अपने शिक्षक का और समाज के लोग नारियों का सम्मान करना भूल गये हैं. इसके स्थान पर समाज में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का विकास हो रहा है. सरेराह महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़खानी और यौन शोषण जैसी घटनाएं हो रही हैं. गुरु की महिमा समाप्त हो रही है. इसके लिए हम सभी को आगे आना होगा.
लक्ष्मी प्रसाद, बरगढ़, गढ़वा
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