महत्वहीन होती प्रतियोगी परीक्षाएं

हाल ही में जैक द्वारा जारी किये गये उत्क्रमित हाइस्कूल की प्रतियोगिता परीक्षा में छात्रों के अंक देख कर घोर अचरज हुआ. छात्रों को कुछ विषयों में तीन सौ पूर्णाक में 287, 271 और 270 तक नंबर दिये गये हैं. ये विषय गृह विज्ञान, नागरिक शास्त्र एवं इतिहास हैं. आश्चर्य की बात है कि इन […]
हाल ही में जैक द्वारा जारी किये गये उत्क्रमित हाइस्कूल की प्रतियोगिता परीक्षा में छात्रों के अंक देख कर घोर अचरज हुआ. छात्रों को कुछ विषयों में तीन सौ पूर्णाक में 287, 271 और 270 तक नंबर दिये गये हैं. ये विषय गृह विज्ञान, नागरिक शास्त्र एवं इतिहास हैं. आश्चर्य की बात है कि इन विषयों में विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक की परीक्षाओं में जितने प्रतिशत अंक नहीं आते, उससे कई गुणा अधिक अंक इनके रिजल्ट में मिला है.
ऐसा होना प्रतियोगी परीक्षाओं का मजाक उड़ाना है या फिर अंकेक्षण में गड़बड़ी? अगर कला संकाय के इन विषयों की बात करें, तो दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए भी 60 फीसदी तक अंक लाना चुनौती भरा होता है. यहां की प्रतियोगी परीक्षा में इतने अधिक अंक प्रदान किया जाना एक सवाल खड़ा करता है.
मुकेश कुमार, हजारीबाग
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