तेल के दाम गिरे तो भाड़ा भी घटे

Published at :03 Nov 2014 11:58 PM (IST)
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तेल के दाम गिरे तो भाड़ा भी घटे

पिछले 15 दिनों में डीजल के दाम प्रति लीटर साढ़े पांच रुपये से ज्यादा गिर चुके हैं. ऐसा पांच सालों बाद हुआ है. इससे पहले डीजल के दामों में कोई गिरावट जनवरी 2009 में दर्ज की गयी थी. लेकिन डीजल की कीमतों में इस कटौती का लाभ अभी तक मुसाफिरों को नहीं मिलना शुरू हुआ […]

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पिछले 15 दिनों में डीजल के दाम प्रति लीटर साढ़े पांच रुपये से ज्यादा गिर चुके हैं. ऐसा पांच सालों बाद हुआ है. इससे पहले डीजल के दामों में कोई गिरावट जनवरी 2009 में दर्ज की गयी थी. लेकिन डीजल की कीमतों में इस कटौती का लाभ अभी तक मुसाफिरों को नहीं मिलना शुरू हुआ है. रांची में प्रदेश डीजल ऑटो चालक महासंघ ने बैठक कर फैसला लिया है कि डीजल ऑटो के किराये में एक रुपये की कमी की जायेगी. यह फैसला सोमवार से लागू हो गया. लेकिन यह कटौती प्रतीकात्मक ही अधिक लगती है. इसमें दो बड़ी खामियां हैं- एक तो यह कि दूरी चाहे जितनी हो, भाड़े में सिर्फ एक रुपये का अंतर आयेगा. साथ ही न्यूनतम किराया पांच रुपये रहेगा, जो आधा-एक किलोमीटर चलनेवालों को महंगा ही लगेगा. दूसरी खामी यह है कि भाड़े में कटौती सशर्त है.

अगर डीजल का दाम एक रुपया भी बढ़ा तो भाड़े में की गयी कमी वापस ले ली जायेगी. वहीं हम बात करें पेट्रोल ऑटो के भाड़े की, तो यहां कटौती के कोई संकेत नहीं हैं, जबकि अगस्त 2014 से अब तक पेट्रोल के दाम प्रति लीटर लगभग साढ़े नौ रुपये गिर चुके हैं. ईंधन के भावों में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करनेवाले मुसाफिरों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. यह राज्य सरकार और जिलों के प्रशासन की ढिलाई दिखाता है. महंगाई की मार ङोल रही जनता के लिए अच्छे दिन तभी आयेंगे, जब महंगाई सिर्फ आंकड़ों में न गिरे, बल्कि विभिन्न चीजों की कीमतों में जो कटौती सरकार या कंपनियों की तरफ से हो रही है, उसका लाभ जनता तक पहुंचे.

पिछले पांच सालों में जनता ने बस और ऑटो का भाड़ा सिर्फ बढ़ते देखा, अब वक्त आ गया है कि उसे घटे हुए भाड़े का स्वाद चखने को मिले. कच्चे तेल के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार गिर रहे हैं. 100 डॉलर के पार पहुंच चुका कच्च तेल 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है. आनेवाले दिनों में भी कच्चे तेल के भाव निचले स्तर पर बने रहने की उम्मीद है. इसलिए सार्वजनिक परिवहन के किराये में बड़ी कटौती का यह सही वक्त है. रांची में बस मालिकों के संगठन की बैठक पांच नवंबर को है. उम्मीद की जानी चाहिए कि वे जनभावना को ध्यान में रख किराये में ठीकठाक कटौती जरूर करेंगे.

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