क्यों बढ़ रहे हैं नेताओं के कड़वे बोल

एक प्रसिद्ध उक्ति है कि मीठा बोलो. बचपन से सुनती आयी हूं कि जो भी बोलो उसे मन के तराजू पर पहले तोलो, लेकिन हमारे नेताओं के कड़वे बोल बढ़ते ही जा रहे हैं. उन्होंने शायद बिना विचारे बोलने की शपथ ले रखी है. उटपटांग बात बोल कर सुर्खियों में छाये रहने की इनकी आदत […]
एक प्रसिद्ध उक्ति है कि मीठा बोलो. बचपन से सुनती आयी हूं कि जो भी बोलो उसे मन के तराजू पर पहले तोलो, लेकिन हमारे नेताओं के कड़वे बोल बढ़ते ही जा रहे हैं. उन्होंने शायद बिना विचारे बोलने की शपथ ले रखी है. उटपटांग बात बोल कर सुर्खियों में छाये रहने की इनकी आदत बनती जा रही है.
जिस निर्भया कांड की विदेशों में भी जम कर भर्त्सना की गयी, उसे हमारे नेताओं की जुबान ने गंदा कर दिया. अब बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शराब की हिमायत की है. एक ओर गांवों में महिलाएं शराब के खिलाफ अभियान चला रही हैं, तो वहीं, मुख्यमंत्री मांझी यह कहते हैं कि शराब को दवा की तरह पीया करो. उन्हें यह बात भी समझनी चाहिए कि शराब के सेवन से गरीबों का घर बर्बाद हो जाता है. जहां लोग बीमार के लिए दवा लेने में असमर्थ हैं, वहां शराब परोसना जायज है?
सिम्मी नाथ, कड़रू, रांची
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