हादसा नहीं, घातक लापरवाही है यह
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Sep 2014 5:02 AM (IST)
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पलामू जिले के विश्रपुर इलाके में रविवार की सुबह बस में करंट उतरने से पांच सवारियों की मौत हो गयी और 16 लोग जख्मी हो गये. क्या यह सिर्फ एक हादसा था? कतई नहीं. इसके लिए सुरक्षा मानदंडों को लेकर हमारी घोर लापरवाही भी जिम्मेदार है. अपने देश में आज भी यही समझ हावी है […]
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पलामू जिले के विश्रपुर इलाके में रविवार की सुबह बस में करंट उतरने से पांच सवारियों की मौत हो गयी और 16 लोग जख्मी हो गये. क्या यह सिर्फ एक हादसा था? कतई नहीं. इसके लिए सुरक्षा मानदंडों को लेकर हमारी घोर लापरवाही भी जिम्मेदार है. अपने देश में आज भी यही समझ हावी है कि हादसा होना या न होना, प्रभु के हाथ में है.
सब किस्मत का खेल है. जो होना है, वह होकर रहेगा. यही मानसिकता हमें सुरक्षा मानदंडों की उपेक्षा करने के लिए प्रेरित करती है. आम लोग ही नहीं, सरकारी तंत्र की भी यही मानसिकता है. जब तक कोई हादसा न हो, वह आंख और कान मूंदे रहता है. कई दफा तो हादसे के बाद भी वह हरकत में नहीं आता है. इस हादसे की वजह यह रही कि बस में स्लीपर बना हुआ था, इसलिए उसकी ऊंचाई तय मानदंडों से ज्यादा थी. करेला, उस पर से नीम चढ़ा वाली बात यह हुई कि बस की छत पर मोटरसाइकिल रख दी गयी.
इसी मोटरसाइकिल का हैंडल बिजली के तारों में फंस गया. ज्यादा ऊंचाई की वजह से स्लीपर बस का संतुलन बिगड़ने का या फिर बिजली के तारों से छू जाने का खतरा रहता है, इसलिए इन पर कानूनी रोक है. लेकिन हकीकत यह है कि हर प्रमुख मार्ग पर स्लीपर बसें बेरोक -टोक दौड़ रही हैं. जिस परिवहन विभाग पर इन्हें रोकने की जिम्मेदारी है, वह इनसे हफ्तावसूली करके चांदी काट रहा है.
कभी-कभार दिखावे के लिए जुर्माने की रसीद काट दी जाती है. अगर परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाता, तो शायद यह हादसा नहीं होता. इस हादसे के लिए दोषी बिजली विभाग भी है. जगह-जगह ढीले तार खंभों से लटकते रहते हैं, जो हर पल हादसे को दावत देते हैं, लेकिन बिजली विभाग की आंखें नहीं खुलती हैं. हादसे की एक वजह यह भी रही कि बस को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 75 को छोड़ कर दूसरी सड़क पकड़नी पड़ी, क्योंकि राजमार्ग का एक हिस्सा टूट-फूट गया है. जिस सड़क से बस गुजर रही थी, वह भारी-भरकम बसों के हिसाब से नहीं बनी है.
इसलिए बिजली के तारों की ऊंचाई का उतना ख्याल नहीं रखा गया. विश्रमपुर का हादसा आम लोगों से लेकर सरकारी तंत्र के लिए एक सबक है. उम्मीद की जानी चाहिए कि सुरक्षा उपायों को लेकर सभी सचेत बनेंगे और लापरवाही की वजह से ऐसा हादसा नहीं होगा.
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