मोदी-जिनपिंग शिखर वार्ता का महत्व

Published at :12 Sep 2014 2:06 AM (IST)
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मोदी-जिनपिंग शिखर वार्ता का महत्व

नरेंद्र मोदी शक्ति के जिस अधिष्ठान पर खड़े हैं, वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ समानता एवं संतुलन का एक ऐसा अध्याय रचा जा सकता है, जो विश्व की राजनीतिक व्यवस्था में एक मोड़ लानेवाला घटनाक्रम बन जाये. ब्राजील में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, जर्मनी की राष्ट्र प्रमुख एंजेला मारकेल और चीन […]

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नरेंद्र मोदी शक्ति के जिस अधिष्ठान पर खड़े हैं, वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ समानता एवं संतुलन का एक ऐसा अध्याय रचा जा सकता है, जो विश्व की राजनीतिक व्यवस्था में एक मोड़ लानेवाला घटनाक्रम बन जाये.

ब्राजील में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, जर्मनी की राष्ट्र प्रमुख एंजेला मारकेल और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से औपचारिक मुलाकात के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान की पांच दिवसीय यात्रा पर गये, जिसे किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री सफलतम विदेश यात्रा के रूप में देखा जा रहा है.

जापान ने न केवल परमाणु परीक्षण के कारण भारत के छह संस्थानों पर लगाये प्रतिबंध हटा लिये, बल्कि 36 अरब डॉलर का महत्वपूर्ण विनिवेश ऋण भी स्वीकृत किया, जो भारत के विकास और संरचनात्मक ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. अब सितंबर माह के अंत में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर आ रहे हैं और इस यात्रा की शुरुआत एक भावनात्मक मैत्री संकेत के रूप में वे प्रधानमंत्री के पैतृक गृह प्रदेश गुजरात से कर रहे हैं.

चीन आज विश्व की महाशक्तियों में तीव्रता से आगे बढ़ रहा है. भारत की अर्थव्यवस्था से चीन की अर्थव्यवस्था लगभग चार गुनी बड़ी है और सेना दोगुनी. अनुमान है कि अगले पांच वर्षो में चीन अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा. चीन का सैनिक व्यय भारत से दस गुना अधिक है. भारत, जापान और अमेरिका के मध्य बढ़ते संबंध भले ही चीन के लिए चिंता का विषय माने जाते हों, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में चीन भारत के साथ मैत्री संबंध बनाने के लिए बहुत उत्सुक है, जिसका तिरस्कार करना कूटनीतिक गलती होगी.

यह उल्लेखनीय है कि चीन के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी पेंग ली युवान भी आ रही हैं. उनका साथ में आना भारत की जनता के लिए एक भावना भरा मैत्री संदेश माना जा रहा है. पेंग ली युवान चीन की एक लोकप्रिय देशभक्तिपूर्ण गीत गानेवाली गायिका हैं और उनका भारत आना एक नयी पहल तथा चीन की ओर से भारत की जनता को एक संजीदगी भरा संदेश माना जा रहा है. पेंग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में जोशीले और उत्साहवर्धक गीत ही नहीं गातीं, बल्कि चीन के उत्पादनों के विश्वव्यापी प्रचार के लिए वहां की सबसे बड़ी स्वदेशी नायिका बन गयी हैं, जो भारत के लिए एक सीखनेवाली बात है.

मोदी और शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता भारत-चीन संबंधों में एक नया मोड़ तथा विगत तमाम वर्षो की कटुता के स्थान पर एक सकारात्मक पहल को जन्म दे सकती है. दोनों ही अपने देश के महत्वपूर्ण और शक्तिशाली नेता हैं, जो नयी सोच और पहल के साथ असाधारण फैसले लेने का साहस रखते हैं.

भारत में चीन का पूंजी निवेश, भारत की अर्थव्यवस्था और यहां के निर्माण क्षेत्र को नकारात्मक ढंग से प्रभावित न करे, यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेवारी है. पिछले कुछ समय में ही चीन से सस्ते स्टील आयात के कारण भारत की 20 इस्पात मिलें बंद हो गयीं. चीन को भारत का सर्वाधिक लौह अयस्क निर्यात होता है, जबकि उसी अयस्क से चीन स्टील के विभिन्न सामान बना कर भारत को दस से बीस गुना अधिक दामों में बेचता है. इसके प्रति भी चिंता है. इसके अलावा भारत-चीन सीमा पर अतिक्रमण और दखलअंदाजी को रोका जाना बहुत जरूरी है. लेकिन, इसके साथ ही चीन को अपने कूटनीतिक संबंधों के दायरे में रखना हमारी आवश्यकता है.

शी जिनपिंग की पृष्ठभूमि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की है और जब वे राष्ट्रपति चुने गये थे, तब माना जाता था कि वहां सेना का बोलबाला बढ़ेगा. लेकिन, उन्होंने आते ही नरेंद्र मोदी की तरह सबको आश्चर्यचकित करते हुए सबसे पहला कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाया, सरकारी खर्चो में बेहद कमी के कठोर आदेश दिये, रेलवे के सर्वोच्च अधिकारी को भ्रष्टाचार में फांसी तक पहुंचाया, भारत के साथ संबंधों को सुधारना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा.

भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को सबसे पहले मजबूत आधार अटल बिहारी बाजपेयी की 2003 की बीजिंग यात्रा के दौरान मिला, जब तिब्बत स्वायत्तशासी प्रदेश को भारत ने मान्यता दी और चीन ने सिक्किम को अपने नक्शों में पृथक देश दिखाना बंद किया. इसके बाद चीनी प्रधानमंत्री वेन जिया बाओ की 2005 और 2010 में दिल्ली की यात्राएं, राष्ट्रपति हू जिनताओ की 2006 में भारत यात्रा और डॉ मनमोहन सिंह की 2008 में चीन यात्राओं में 36 से अधिक ऐसे असाधारण वार्ता एवं संवाद के समझौते हुए, जो जनवरी, 2008 में ‘इक्कीसवीं शताब्दी हेतु साझी दृष्टि’ जैसे महत्वपूर्ण संयुक्त दस्तावेज में अभिव्यक्त हुए.

दो वर्ष पहले तक भारत में चीन का कुल पूंजी निवेश लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि चीन में भारत का निवेश 45 अरब डॉलर तक का है. भारत और चीन के मध्य कूटनीतिक संबंधों की सातवीं वर्षगांठ के दौरान चीन के 45 शहरों में भारत महोत्सव मनाया गया और 2012 में भारत की सबसे बड़ी शिक्षा एवं परीक्षा संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने भारतीय विद्यालयों में चीनी भाषा की शिक्षा का एक करार किया. चीन के लगभग हर शहर में योग विद्या के केंद्र हैं, बॉलीवुड की फिल्में बेहद लोकप्रिय हैं तथा हर टैक्सी हिंदी गाने अथवा हिंदी गानों का चीनी मिक्स दिनभर मस्ती में बजाते हैं. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीजिंग स्थित मुख्यालय में योग केंद्र का एक अलग से कक्ष बनाया गया है और कम्युनिस्ट नेताओं को योग के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

हालांकि इन सब बातों की पृष्ठभूमि में विवाद के बिंदु दरकिनार नहीं किये जा सकते. सीमा विवाद सबसे महत्वपूर्ण और भारतीयों को उद्वेलित करनेवाला मसला है. लेकिन इसका श्रेय दोनों देशों की परिपक्वता को जाता है कि 1962 के बाद तीव्र सीमा विवाद होते हुए भी दोनों सेनाओं के मध्य एकाध भी गोली नहीं चली और सीमा विवाद हल करने के लिए वार्ता का 15वां दौर हाल ही में संपन्न हुआ है.

इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शक्ति के जिस अधिष्ठान पर खड़े हैं, वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ समानता एवं संतुलन का एक ऐसा अध्याय रचा जा सकता है, जो विश्व की राजनीतिक व्यवस्था में एक मोड़ लानेवाला घटनाक्रम बन जाये.

तरुण विजय

राज्यसभा सांसद, भाजपा

tarunvijay2@yahoo.com

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