ओबामा की जंग की आसान नहीं डगर

Published at :12 Sep 2014 1:59 AM (IST)
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ओबामा की जंग की आसान नहीं डगर

कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक चौंकानेवाला बयान दिया था. उन्होंने कहा था, इराक एवं सीरिया में सक्रिय खतरनाक आतंकी संगठन इसलामिक स्टेट से निपटने के लिए उनके पास कोई रणनीति नहीं है. तब तक अमेरिकी जहाज इस संगठन के खिलाफ बमबारी शुरू कर चुके थे और इराकी सेना को रणनीतिक मदद […]

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कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक चौंकानेवाला बयान दिया था. उन्होंने कहा था, इराक एवं सीरिया में सक्रिय खतरनाक आतंकी संगठन इसलामिक स्टेट से निपटने के लिए उनके पास कोई रणनीति नहीं है.

तब तक अमेरिकी जहाज इस संगठन के खिलाफ बमबारी शुरू कर चुके थे और इराकी सेना को रणनीतिक मदद मुहैया करा रहे थे. आखिरकार, बुधवार को ओबामा को यह निर्णय लेना पड़ा कि इसलामिक स्टेट के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की जायेगी और उसके सीरियाई ठिकानों पर भी हमले होंगे. स्वयं ओबामा ने भी माना है कि यह लड़ाई लंबी चलेगी. इसलामिक स्टेट के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अमेरिकी असमंजस के कुछ ठोस कारण हैं.

मध्य-पूर्व एशिया की उलझी हुई राजनीति का इसलामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव के साथ गहरा संबंध है तथा इस उलझाव में अमेरिका एवं अन्य पश्चिमी देशों की भी बड़ी भूमिका है. ओबामा जानते हैं कि इसका समाधान सिर्फ सैन्य कार्रवाई से नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस संकट का एक कारण इराक पर 2003 में किया गया अमेरिकी हमला भी है. इस क्षेत्र में ईरान और सऊदी अरब के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई दूसरा बड़ा कारण है. यह स्पष्ट है कि इसलामिक स्टेट को सऊदी अरब और कतर का परोक्ष समर्थन प्राप्त है तथा इराक व सीरिया की सरकारों को ईरान मदद दे रहा है. सऊदी अरब एवं कतर के परस्पर संबंध भी समस्याग्रस्त हैं.

अमेरिका की विडंबना यह है कि वह अपने मित्र देशों- सऊदी अरब और कतर- को अधिक नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता, वहीं ईरान के साथ बेहतर हो रहे संबंधों को भी नहीं बिगाड़ सकता. ओबामा सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को अवैधानिक मानते हैं और इसलामिक स्टेट भी बशर को हटाना चाहता है. उधर, ईरान के अलावा रूस भी बशर के साथ खड़ा है. यूक्रेन को लेकर रूस व अमेरिका में तनातनी की स्थिति पहले से है. ईरान और अरब नहीं चाहते हैं कि कुर्द समुदाय ताकतवर बने और स्थिति यह है कि कुर्दो के बिना यह लड़ाई जीत पाना संभव नहीं है. ऐसे में अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसे में लेना चाहिए, क्योंकि इसलामिक स्टेट, अल-कायदा, बोको हराम जैसे संगठनों के आतंक से समूचा विश्व त्रस्त है.

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