खत्म हो रही गुरु-शिष्य परंपरा

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक घटना घटी, जो निंदनीय और स्तब्ध करने वाली है. एक अध्यापिका ने गृहकार्य न करने पर एक बच्चे को रॉड से बेरहमी से पीटा. दर्द से बच्चे की कराह न निकल सके, इसलिए उसके मुंह में रूमाल ठूंस दिया. पिटाई से बच्चे का पूरा शरीर सूज गया, […]
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक घटना घटी, जो निंदनीय और स्तब्ध करने वाली है. एक अध्यापिका ने गृहकार्य न करने पर एक बच्चे को रॉड से बेरहमी से पीटा. दर्द से बच्चे की कराह न निकल सके, इसलिए उसके मुंह में रूमाल ठूंस दिया. पिटाई से बच्चे का पूरा शरीर सूज गया, उस पर लाल निशान पड़ गये. स्कूल की छुट्टी के समय जब मां बच्चे को लेने उसकी कक्षा में आयी, तो उसे बेहोश अवस्था में पाया. देश में इससे मिलती-जुलती घटनाएं रोज घटती हैं.
सवाल यह है कि क्या देश में हमारी सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा खत्म होती जा रही है? या फिर अध्यापन का स्तर इतना गिर चुका है कि छोटी-सी गलती पर बच्चों को न भूलने वाली सजा दी जाने लगी है? यह केवल नैतिकता से जुड़ा सवाल नहीं है, बल्कि प्रशासन से जुड़ा प्रश्न भी है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ तालाबंदी की इजाजत क्यों नहीं दी जाती?
पंकज राव, गोड्डा
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