इंटरनेट की दुनिया का ढीला कैरेक्टर

Published at :07 Aug 2014 5:51 AM (IST)
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इंटरनेट की दुनिया का ढीला कैरेक्टर

।। रजनीश आनंद ।। प्रभात खबर.कॉम जब मुझे इंटरनेट पत्रकारिता का मौका मिला, तो बड़ी खुशी हुई. अब मैं रांची में कुछ लिखूं, तो अफ्रीका में सहारा रेगिस्तान का निवासी भी मुझे पढ़ सकता है. पूरे जोश के साथ मैं दफ्तर पहुंची. तभी एक बड़ी खबर आयी, सी-सैट को हटाने के लिए छात्रों के आंदोलन […]

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।। रजनीश आनंद ।।

प्रभात खबर.कॉम

जब मुझे इंटरनेट पत्रकारिता का मौका मिला, तो बड़ी खुशी हुई. अब मैं रांची में कुछ लिखूं, तो अफ्रीका में सहारा रेगिस्तान का निवासी भी मुझे पढ़ सकता है. पूरे जोश के साथ मैं दफ्तर पहुंची. तभी एक बड़ी खबर आयी, सी-सैट को हटाने के लिए छात्रों के आंदोलन की.

मैंने पूरे तन-मन से यह खबर लिखी और अपने अखबार की वेबसाइट पर अपलोड कर दी. इंटरनेट पत्रकारिता में आप तुरंत फीडबैक पा सकते हैं. मुझे यकीन था कि मेरी खबर सबसे ज्यादा लोग पढ़ रहे होंगे. लेकिन रिपोर्ट कार्ड देखते ही मेरा गुमान टूट गया. टॉप टेन में मेरी खबर सबसे नीचे थी. सबसे ऊपर जो खबर थी, उसमें बताया गया था कि किस तरह सनी लियोन का गाना पिंक लिप्स लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.

इसके बाद जो खबरें थीं, वे बॉलीवुड से या फिर दुष्कर्म से संबंधित थीं. मैं निराश हो गयी और अपने सीनियर से पूछा, आखिर मेरी खबर को क्यों नहीं पढ़ा जा रहा है? उन्होंने मेरा ज्ञानवर्धन किया- देखिए मैडम, इंटरनेट पर आजकल खबरें ‘ट्रेंड’ के हिसाब से लिखी जाती हैं. जो विषय सोशल साइटों पर ट्रेंड कर रहा हो, उस पर लिखें. ट्रेंड को समझने की कोशिश में कई दिनों से परेशान थी.

तभी मैंने देखा कि ट्विटर पर हॉफ गर्लफ्रेंड ट्रेंड कर रहा है. यह चेतन भगत की आनेवाली किताब का नाम है, जो एक मसाला प्रेम कहानी है. तो क्या इंटरनेट पर यही सब चलता है? इसी उधेड़बुन में ऑफिस से घर के लिए निकली. मैंने अपने परम मित्र शर्माजी से सलाह करने का मन बनाया और सीधे उनके घर पहुंची. शर्माजी बाहर ही टहलते मिल गये. मैंने अपना हाल-ए-दिल बयां किया. इस पर वह बोले, ‘‘क्या करेंगी मैडम, इंटरनेट की दुनिया भले बहुत बड़ी हो, लेकिन इसका कैरेक्टर ढीला है.

इंटरनेट पर वही चीजें ज्यादा तलाशी जाती हैं, जिनसे हम सार्वजनिक जीवन में बचते हैं.’’ मैंने उन्हें बताया कि खबरों को वैसे ढंग से पेश किया जा रहा है जैसी हकीकत में वो होती नहीं हैं. मेरी पीड़ा समझते हुए शर्माजी ने पूरी सहानुभूति जतायी और कहा, ‘‘अरे मोहतरमा, आप बेवजह परेशान हैं.

ठीक है, इंटरनेट पर गंभीर चीजें पढ़नेवाले कम हैं. लेकिन इसका मतलब यह थोड़े न है कि आप ‘डेड’ हो गयी हैं. आप लिखना जारी रखें. गंभीर विषयों पर भी लोग पढ़ते हैं. फिर आप यह भी देखें कि इंटरनेट यूजर ज्यादातर युवा हैं. उन्हें फिल्मों वगैरह में ही ज्यादा रुचि होती है, वे कहां जन सरोकार को समझते हैं.’’ शर्माजी की सहानुभूति को मैं समझ गयी थी और यह भी जान गयी थी कि इंटरनेट की दुनिया में गंभीर पत्रकारिता के लिए कितने अवसर हैं.

सो, मैं उनसे विदा लेकर घर की ओर चल पड़ी, तभी किसी के घर से आती टीवी की आवाज मेरे कानों में पड़ी, जिसमें हमारे प्रधानमंत्री मीडियाकर्मियों को मीडिया ट्रेडर्स बता रहे थे. उनका यह संबोधन मुझे नश्तर की तरह चुभता था, लेकिन अब मुझे उस संबोधन की सच्‍चाई पता चल चुकी थी..

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