हमारी साझी विरासत पर चोट!

साल 1983 में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन के वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि उन्हें इस बात का गर्व है कि वे उस देश से हैं, जिसने सभी धर्मों के सभी देशों के सताये गये लोगों को अपने यहां शरण दी है. इस तरह भारत सदियों से धर्मनिरपेक्ष चरित्र वाला रहा है. इस […]
साल 1983 में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन के वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि उन्हें इस बात का गर्व है कि वे उस देश से हैं, जिसने सभी धर्मों के सभी देशों के सताये गये लोगों को अपने यहां शरण दी है. इस तरह भारत सदियों से धर्मनिरपेक्ष चरित्र वाला रहा है. इस देश ने किसी को भी धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी है.
ऐसे में बेहद विवादित नागरिकता संशोधन कानून 2019 पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के मुसलमान अल्पसंख्यक शरणार्थियों को धर्म के आधार पर नागरिकता के प्रावधान से बाहर रखना देश की धर्मनिरपेक्षता के साथ इसकी बहुभाषी, बहुनस्लीय तथा बहुधार्मिक संस्कृति की साझी विरासत पर चोट तो है ही, साथ ही देश की आजादी के संघर्ष के बाद निर्मित भारतीय लोकतंत्र की भावनाओं का भी अपमान है.
अंकित कुमार मिश्रा, बेंगलुरु, कर्नाटक
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