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हस्तशिल्प कारीगरों का मेला

Updated at : 12 Dec 2019 6:41 AM (IST)
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हस्तशिल्प कारीगरों का मेला

शफक महजबीन टिप्पणीकार mahjabeenshafaq@gmail.com विविधताओं से भरे हमारे देश में कलाओं की भी खूब विविधता है. एक से बढ़कर एक हमारी कलाएं न सिर्फ लोगों के मानस को लुभाती हैं, बल्कि साथ ही अनेक लोगों की जीविका का साधन भी बनती हैं. उन्हीं कलाओं में हस्तशिल्प भी एक है, जो देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में […]

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शफक महजबीन

टिप्पणीकार

mahjabeenshafaq@gmail.com

विविधताओं से भरे हमारे देश में कलाओं की भी खूब विविधता है. एक से बढ़कर एक हमारी कलाएं न सिर्फ लोगों के मानस को लुभाती हैं, बल्कि साथ ही अनेक लोगों की जीविका का साधन भी बनती हैं.

उन्हीं कलाओं में हस्तशिल्प भी एक है, जो देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी महत्ता के लिए जानी जाती है. हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने, हस्तशिल्प सामग्रियों को तमाम लोगों तक पहुंचाने और उनका प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से हर साल आठ से 14 दिसंबर के बीच ‘अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह’ मनाया जाता है. यह एक ऐसा मेला है, जो भारतीय हस्तशिल्प कलाओं से जुड़ी परंपराओं और संस्कृतियों को जीवित रखता है.

साल 1952 में भारत में हस्तशिल्प को लेकर सभी समस्याओं और उसके विकास को तेज करने के उद्देश्य से भारत के वस्त्र मंत्रालय की अध्यक्षता में ऑल इंडिया हैंडीक्राफ्ट बोर्ड की स्थापना हुई.

जाहिर है, हस्तशिल्प के तकनीकी, वित्तीय और कलात्मक विपणन के लिए यह बहुत जरूरी था, ताकि ग्रामीण हस्तशिल्प कारीगरों के लिए रोजगार उपलब्ध हो सके. इस बोर्ड में कई हस्तशिल्प और हथकरघा संगठन शामिल हैं. यह बोर्ड देशभर में विभिन्न जगहों पर हस्तशिल्प कला प्रदर्शनियों का आयोजन करता है, हस्तशिल्प सामग्रियों के निर्यात का रास्ता तैयार करता है. गौरतलब है कि बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस वर्ष हस्तशिल्प मेले का बड़ा आयोजन किया है.

हस्तशिल्प मेले में सभी राज्यों के हस्तशिल्प कारीगर-कलाकार आकर अपने कार्यों का प्रदर्शन करते हैं. झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में अच्छे-खासे हस्तशिल्प कारीगर हैं.

झारखंड में हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान देने के लिए शुरू की गयी झारखंड सरकार की समर्थ योजना से हस्तशिल्पियों को लाभ भी मिल रहा है. हर राज्य में हस्तशिल्प विस्तार की ऐसी योजनाएं चलायी जानी चाहिए, ताकि वहां के कारीगरों के कार्यों के जरिये स्थानीय परंपरा और संस्कृति का संरक्षण हो सके. वहीं हस्तशिल्प के विस्तार के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये हस्तशिल्प कारीगरों को अपना ब्रांड स्थापित करने के मौका मिलता है. यहीं से तकनीकी उपकरणों के रास्ते उनके सामानों को ऑनलाइन बेचने का मार्ग प्रशस्त होता है.

लोक चित्रकला, फाड़ चित्रकला, चिकनकारी, दरी बुनाई, कनी शॉल बुनाई, हाथ से ब्लॉक प्रिंटिंग, बंधेज टाई डाई, लाख की चूड़ियां, कांथादर्पण कार्य, क्रूल कढ़ाई, पिपली और क्रोशिया की बुनाई, फुलकारी और कलमकारी चित्रकारी, जरदोजी आदि ऐसे हस्तशिल्प कार्य हैं, जिनके जरिये स्थानीयता का राष्ट्रीय पहचान मिलती है. कहते हैं कि कलाएं हमारी परंपराओं और संस्कृतियों को संवारती हैं, निखारती हैं और दूर-दूर तक उनकी महत्ता भी पहुंचाती हैं. इसलिए हम सबको भी ऐसे आयोजनों में बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, ताकि कारीगरों की रोजी बरकरार रहे और उन्हें प्रोत्साहन भी मिले.

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