ePaper

निजीकरण से विकास संभव नहीं

Updated at : 08 Nov 2019 7:37 AM (IST)
विज्ञापन
निजीकरण से विकास संभव नहीं

भारत विकसित देशों की पंक्ति में अपना स्थान बनाने को आतुर है. विकसित देश भी भारत की विशाल अर्थव्यवस्था और विस्तृत बाजार को ललचाई निगाहों से देख रहे हैं. इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव तो अवश्यंभावी है, परंतु हमारी विकास की गाड़ी त्वरित गति से गतिमान है. लेकिन, सरकार विकसित अर्थव्यवस्था के सपने में खोयी […]

विज्ञापन
भारत विकसित देशों की पंक्ति में अपना स्थान बनाने को आतुर है. विकसित देश भी भारत की विशाल अर्थव्यवस्था और विस्तृत बाजार को ललचाई निगाहों से देख रहे हैं. इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव तो अवश्यंभावी है, परंतु हमारी विकास की गाड़ी त्वरित गति से गतिमान है.
लेकिन, सरकार विकसित अर्थव्यवस्था के सपने में खोयी हुई अपने नीतियों से भटक रही है. अपने सरकारी तंत्र की कमियों को छुपाने की चाह में निजीकरण को बढ़ावा देने की नीति तर्कसंगत नहीं है. भारत एक लोकतांत्रिक सामाजिक समरसता की एक अद्भुत मिसाल वाला देश है, यह पूंजीवादी देश नहीं है.
निजी हाथों में व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण हो सकता है, परंतु जनता के हित के बजाय कुछ मुट्ठी भर लोगों की जेबें ही गर्म होंगी. देश के कुछ राज्यों में प्राथमिक शिक्षा को निजी हाथों में दे दिया जाना कदापि उचित नहीं है. निजीकरण से विकास के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता. लोकतंत्र में जनता के बहुमूल्य वोट सिर्फ सरकार बनाकर अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि करना नहीं, बल्कि अपने पुरुषार्थ पर जनता की भलाई करना होता है.
देवेश कुमार, गिरिडीह
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola