पाकिस्तान और आतंकवाद

अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में 18 साल पहले हुए भयावह आतंकी हमलों को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताया है. यह भी रेखांकित किया कि एक पड़ोसी देश से इस खतरे को समर्थन और संरक्षण मिल रहा है. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जगजाहिर तथ्य है […]
अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में 18 साल पहले हुए भयावह आतंकी हमलों को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताया है.
यह भी रेखांकित किया कि एक पड़ोसी देश से इस खतरे को समर्थन और संरक्षण मिल रहा है. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जगजाहिर तथ्य है कि दशकों से पाकिस्तान पड़ोसी देशों- विशेषकर भारत और अफगानिस्तान- को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद का सहारा ले रहा है. विश्व में अन्यत्र हुई कई घटनाओं के तार भी पाकिस्तान से जुड़े होने के ठोस सबूत मिले हैं.
वास्तविकता यह है कि यह उसकी विदेश और रक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुका है. बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान में आतंक पर अंकुश लगाने और शांति के लिए पाकिस्तान से संचालित आतंकी गिरोहों पर लगाम लगाने की मांग की है. गौरतलब है कि न्यूयॉर्क हमलों से पहले अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश भारत की इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लेते थे कि पाकिस्तान दक्षिणी एशिया को अस्थिर करने का सुनियोजित अभियान चला रहा है.
हालांकि पाकिस्तान ने आतंक के विरुद्ध वैश्विक अभियान में सहयोगी होने का ढोंग तो किया है और इसके बदले अमेरिका से धन भी हासिल किया है, पर दूसरी ओर हिंसक और चरमपंथी समूहों की सहायता भी उसने जारी रखी. कुछ समय पहले अमेरिकी दौरे पर गये पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकारा था कि आज भी उनके देश में 30-40 हजार आतंकवादी सक्रिय हैं तथा पूर्ववर्ती सरकारों ने दुनिया को इस बारे में गुमराह किया है.
चिंताजनक है कि इमरान सरकार भी उन्हीं नीतियों पर चल रही है. एक तरफ अफगानिस्तान में हिंसा बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ पाक सेना जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर युद्धविराम का निरंतर उल्लंघन कर रही है. इस वर्ष जनवरी से अगस्त के बीच ऐसी 1,889 घटनाएं हो चुकी हैं. पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 में परिवर्तन के बाद से औसतन हर दिन 10 बार गोलाबारी की जा रही है.
गोलाबारी की आड़ में कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने के प्रयास भी होते रहते हैं. रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अगस्त तक भारतीय सुरक्षाबलों के हाथों जम्मू-कश्मीर में 139 आतंकवादी मारे गये हैं, जिनमें अनेक नियंत्रण रेखा के निकट हुए मुठभेड़ों में निशाना बने हैं. नौसेना को अंदेशा है कि प्रशिक्षित आतंकियों का समूह समुद्र के रास्ते भारत में हमले करने का षड्यंत्र रच रहा है.
भारत ने पहले भी पाकिस्तान और आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है और वह आगे भी ऐसा करने में सक्षम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी उसके खतरनाक पैंतरों पर कठोर कदम उठाना चाहिए. पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाकर आतंकी सरगनाओं और उनके इरादों को ध्वस्त करने की जरूरत है, अन्यथा दक्षिणी एशिया समेत दुनियाभर में शांति और विश्वास के लिए संकट बना रहेगा.
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