बेहतर हों शहर
Updated at : 06 Sep 2019 7:48 AM (IST)
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भारत उन देशों में शामिल है, जहां शहरीकरण की गति सबसे तेज है. शहरों में सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में सरकारी कोशिशें भी लगातार होती रहती हैं. फिर भी हमारे शहर दुनिया के अच्छे शहरों की सूची में बहुत नीचे हैं. प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ की ओर से कुछ दिन पहले जारी सुरक्षित […]
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भारत उन देशों में शामिल है, जहां शहरीकरण की गति सबसे तेज है. शहरों में सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में सरकारी कोशिशें भी लगातार होती रहती हैं. फिर भी हमारे शहर दुनिया के अच्छे शहरों की सूची में बहुत नीचे हैं. प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ की ओर से कुछ दिन पहले जारी सुरक्षित शहर सूचकांक में मुंबई 45वें और दिल्ली 52वें पायदान पर हैं.
उल्लेखनीय है कि शीर्ष के 10 देशों में छह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हैं. इस सूचकांक का निर्धारण चार आधारों- डिजिटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत सुरक्षा- पर होता है. हालांकि, बीते सालों में इन पहलुओं पर भारतीय शहरों में सुधार के संकेत हैं, पर अच्छे शहरों में गिनती के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
स्वच्छ भारत कार्यक्रम, यातायात इंफ्रास्ट्रक्चर तथा योजनाबद्ध उपनगरों के विस्तार के सराहनीय परिणाम सामने आ रहे हैं, परंतु उद्योगों, निर्माण कार्यों और वाहनों की बढ़ती संख्या से हमारे शहर खतरनाक प्रदूषण के चंगुल में हैं. ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित 30 शहरों में 22 भारत में हैं.
प्रदूषित राजधानियों में दिल्ली पहले स्थान पर है. आमदनी में बड़े स्तर पर असमानता होने के कारण हमारे शहरों की बड़ी आबादी को जरूरी सुविधाओं के बिना झुग्गी-झोपड़ियों और सघन कॉलोनियों में बसर करना पड़ता है. यह आबादी खाने-पीने और दवाइयों का समुचित इंतजाम नहीं कर पाती है. चिकित्सा सुविधाएं भी अपर्याप्त हैं.
विकास के विषम वितरण के कारण दूर-दराज और देहात से लोगों के शहर आने का सिलसिला लगा रहता है. इससे शहर की मौजूदा सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ता है. शहरों में अपराध बढ़ने के रुझान भी चिंताजनक हैं.
‘द इकोनॉमिस्ट’ ने बसने के लिहाज से बेहतर शहरों की एक अन्य सूची भी जारी की है. इसमें अपराध और प्रदूषण की समस्याओं के कारण दिल्ली पिछली सूची से छह पायदान खिसक कर 118वें स्थान पर आ गयी है. मुंबई भी दो स्थान नीचे आकर 119वें पर है. ध्यान रहे, इन सूचकांकों को बनाने में सिर्फ 60 देशों के 140 शहरों का ही संज्ञान लिया गया है. देश के विकास और समृद्धि में शहरों की निर्णायक भूमिका होती है. शहरों और वहां बसनेवालों की संख्या बढ़ रही है.
ऐसे में पानी, बिजली, आवास, यातायात, कानून व व्यवस्था, कचरा प्रबंधन तथा रोजगार के लिए नयी दृष्टि की दरकार है. जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान बढ़ने से बाढ़ और गर्मी की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं. उत्तर भारत में जहां गर्मी असहनीय होती जा रही है, वहीं पश्चिमी और दक्षिणी भारतीय शहर तेज बारिश और बाढ़ से जूझ रहे हैं.
सरकारों और शहरी प्रशासन को शहरों के प्रबंधन की दशा-दिशा की समुचित समीक्षा के आधार पर दीर्घकालिक रणनीति तैयार होनी चाहिए. इसमें स्थानीय निकायों और नागरिकों की प्राथमिक भूमिका सुनिश्चित होनी चाहिए और जरूरी निवेश उपलब्ध कराने पर जोर होना चाहिए, ताकि हमारे शहरों को बेहतर बनाया जा सके.
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