बाढ़ की विभीषिका
Updated at : 02 Aug 2019 6:49 AM (IST)
विज्ञापन

बिहार, असम, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में बाढ़ की विभीषिका को देखकर मन व्यथित है. पीड़ितों में मासूम बच्चे, असहाय बुजुर्ग, मरीज इत्यादि भी शामिल हैं. मासूमों के आंसू दिल में चुभन पैदा करती है. बुजुर्गों का चीत्कार सिहरन पैदा करती है. घर तो है पर रह नहीं सकते. नल तो है पर पानी […]
विज्ञापन
बिहार, असम, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में बाढ़ की विभीषिका को देखकर मन व्यथित है. पीड़ितों में मासूम बच्चे, असहाय बुजुर्ग, मरीज इत्यादि भी शामिल हैं. मासूमों के आंसू दिल में चुभन पैदा करती है.
बुजुर्गों का चीत्कार सिहरन पैदा करती है. घर तो है पर रह नहीं सकते. नल तो है पर पानी पी नहीं सकते. पैसे तो हैं पर कुछ खरीद नहीं सकते. चूल्हे तो हैं पर खाना पका नहीं सकते. बिछावन तो है पर दुधमुंहे को सुला नहीं सकते. हर साल यही स्थिति पैदा होती है. बाढ़ की इस स्थिति में मानव असहाय व बेबस नजर आता है. सिस्टम भी फेल है.
सरकार सिर्फ संवेदना प्रकट कर रही है. ऐसी परिस्थिति में मुझे महान वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब के `नदी जोड़ो परियोजना` की याद आती है. काश! इस पर गंभीरता से विचार-विमर्श करके लागू किया जाता, तो शायद आज देशवासियों को यह दिन नहीं देखना पड़ता. निःसंदेह मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं.
प्रिंस, सिकंदरा, जमुई
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




