‘आधुनिक’ और ‘नये’ भारत का अर्थ

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jul 2019 6:10 AM

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रविभूषण वरिष्ठ साहित्यकार ravibhushan1408@gmail.com भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के भारत-संबंधी ‘आइडिया’ भिन्न है. नेहरू ने 1942-46 में महाराष्ट्र के अहमद नगर फोर्ट में, जेल में रहते हुए ‘भारत एक खोज’ (डिस्कवरी ऑफ इंडिया, 1946) लिखी थी. वे भारत की इतिहास-संस्कृति से सुपरिचित थे. सभी प्रधानमंत्रियों में […]

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रविभूषण
वरिष्ठ साहित्यकार
ravibhushan1408@gmail.com
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के भारत-संबंधी ‘आइडिया’ भिन्न है. नेहरू ने 1942-46 में महाराष्ट्र के अहमद नगर फोर्ट में, जेल में रहते हुए ‘भारत एक खोज’ (डिस्कवरी ऑफ इंडिया, 1946) लिखी थी. वे भारत की इतिहास-संस्कृति से सुपरिचित थे. सभी प्रधानमंत्रियों में कहीं अधिक बौद्धिक और विचारवान. उन्होंने लगभग नौ वर्ष (3,259 दिन) जेल में बिताये थे और राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन में कहीं अधिक संघर्ष किया था. नेहरू महात्मा गांधी के सर्वाधिक विश्वासपात्र थे.
स्वाधीनता आंदोलन के दौर में ही ‘नये’ भारत की आकांक्षा गांधी, नेहरू में ही नहीं, अन्य स्वाधीनता सेनानियों और कवि-लेखकों में भी थी. निराला ने अपनी एक कविता में आठ-नौ बार ‘नव’ और ‘नवल’ शब्द का प्रयोग किया है.
नेहरू की भारत-परिकल्पना गांधी से सर्वथा भिन्न थी. ‘आधुनिक’ और ‘आधुनिकता’ का संबंध पश्चिम से, यूरोप से था. नेहरू की मृत्यु के बाद ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने उन्हें ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ कहा था.
उन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी. उद्योग-धंधे खड़े किये, संस्थाओं का निर्माण किया. आजाद भारत के आरंभ में सकल घरेलू उत्पाद 10 प्रतिशत से कम था. नेहरू के समय भारत में गति आयी. साल 1947 में भारत की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी, लगभग अस्सी प्रतिशत जनता अशिक्षित थी. ब्रिटिश अर्थशास्त्री बरबरा वार्ड ने 1961 में यह कहा था कि भारत की प्रक्रिया निरंतर आर्थिक समृद्धि की है.
पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजना के बीच कृषि सहित लगभग सभी क्षेत्रों में निवेश लगभग दो गुना था. साल 1962 तक आर्थिक समृद्धि (ग्रोथ) चार प्रतिशत थी. अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक माइकल ब्रेचर ने साफ-साफ इसका श्रेय नेहरू के प्रयत्नों को दिया था. नेहरू के समय खाद्यान्न उत्पादन में भारत बहुत शानदार था, जिसे एक भूतपूर्व औपनिवेशिक पदाधिकारी ग्रिफिथ ने असंभव समझा था.
भारत की आधुनिक राष्ट्रीयता की नेहरू की अवधारणा के चार प्रमुख आयाम थे- लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और गुटनिरपेक्षता. नेहरू की स्पष्ट रूप से एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक एवं विदेश नीति थी. उन्होंने आधुनिक भारत की न केवल नींव रखी, एक भवन भी निर्मित किया. आज के भारत की कल्पना नेहरू के बिना नहीं की जा सकती.
उन्होंने पूरी निष्ठा और कर्मठता से भारत को ‘आधुनिक’ बनाया. ‘आधुनिकता’ का यह मॉडल यूरोपीय था. नेहरू को लहू-लुहान भारत मिला था, क्षत-विक्षत और घायल भारत. एक करोड़ 40 लाख शरणार्थी की व्यवस्था करनी थी. नेहरू ने भारत को एक नयी शक्ल दी. उन्होंने भारत को ‘पुराना’ नहीं रहने दिया. वैज्ञानिक संस्थाएं बनीं. पश्चिम के समकक्ष भारत को लाने की उनकी एक जिद थी.
नेहरू के स्वप्न और नरेंद्र मोदी के स्वप्न में अंतर है. पिछले सप्ताह (26 जून, 2019) नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर भाजपा के ‘न्यू इंडिया’ पर किये गये मजाक पर प्रहार किया. कुछ कांग्रेसी सांसदों द्वारा पुराने भारत को पसंद किये जाने पर मोदी ने पुराने भारत को कांग्रेस की हरकतों से जोड़ा. उन्होंने पुराने भारत को संकीर्ण अर्थ में ग्रहण कर ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’, ‘अनगिनत घोटाले’, ‘जलसेना के जहाजों के निजी उपयोग’ की बात कही, जबकि कांग्रेसी सांसद का कथन था कि पुराने भारत में घृणा, क्रोध और लिंचिंग नहीं थी.
कांग्रेसी सांसद का प्रधानमंत्री से इस पुराने भारत को लौटाने का आग्रह था. मोदी के लिए लोगों का रेल टिकट के लिए कतार में खड़े हाेना और चतुर्थ श्रेणी नौकरियों के लिए भी इंटरव्यू देना पुराना भारत था. पुराने भारत का यह कैसा काल-बोध है? कांग्रेस भारत का पर्याय नहीं है. भाजपा और आरएसएस भी भारत का पर्याय नहीं हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में और उसके बाद भी ‘जला दो जीर्ण-क्षीर्ण प्राचीन’ कहा जाता रहा है.
ऐसी समझ सही नहीं है कि नेहरू अब अप्रासंगिक हैं और मोदी प्रासंगिक. प्रश्न इन दोनों प्रधानमंत्रियों के विजन का है और नेहरू का विजन मोदी की तुलना में कहीं बहुत ही बड़ा था. अब लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और गुटनिरपेक्षता पहले की तरह नहीं है. विश्व अर्थव्यवस्था ने सब कुछ उलट-पुलट डाला है. मोदी ने अपने एक भाषण में जिस प्रकार अपने ‘न्यू इंडिया’ को परिभाषित किया है, वह मात्र वाग्जाल है.
‘सत्यमेव जयते’, ‘वसुधैव कुटुंबकम’, ‘अहिंसा परमो धर्म:’, ‘एक सद विप्रा बहुधा वदंति’, ‘वैष्णव जन ते तेणे कहिये, जो पीर पराई जाणे रे’, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमंते तत्र देवता:’, ‘दरिद्र नारायण की सेवा’, ‘सर्वपंथ समभाव’, ‘आ नो भद्रां कृत्वो थंतु विश्वत:’ सबको भारत का अपना ‘आइडिया’ कहा है. ‘माइ आइडिया ऑफ इंडिया’ पर मोदी के विचार सुनने पर ऐसा लगता है कि उन्होंने सब कुछ समेट लिया है, कुछ भी नहीं छोड़ा है.
मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के ‘कंसेप्ट’ में एक साथ तकनीक, कॉरपोरेट, कॉरपोरेट-क्रोनी कैपिटल और हिंदुत्व है. उन्होंने ‘न्यू इंडिया’ के अंतर्गत पुनरुत्थान भारत, डिजिटल भारत, समावेशी भारत, आविष्कारशील भारत, निवेशक अनुकूल भारत, परिवर्तनकामी भारत, स्वच्छ भारत, कौशल भारत, पारदर्शी भारत, रूपांतरित होनेवाला भारत, उभरता भारत, केयरिंग इंडिया, संचारशील, ईमानदार भारत है. यह सब कुछ और नया कुछ भी नहीं. प्रश्न अवधारणा का है. भारत-संबंधी नेहरू और मोदी की अवधारणा एक-दूसरे से भिन्न है.
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