ऑनलाइन परीक्षा से बच्चों में घट रही सृजनात्मक क्षमता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Jul 2019 6:07 AM (IST)
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अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाएं अब ऑनलाइन लिये जा रहे हैं या फिर लेने की तैयारी चल रही है. कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं से खर्च में कमी, सहूलियत, कागजों की बर्बादी पर रोक, पारदर्शिता तथा समय पर रिजल्ट घोषित करने में कारगर साबित हो रहा है. वहीं छात्र-छात्राओं को तकनीक से जोड़कर उसे ग्लोबल भी बनाया जा रहा […]
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अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाएं अब ऑनलाइन लिये जा रहे हैं या फिर लेने की तैयारी चल रही है. कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं से खर्च में कमी, सहूलियत, कागजों की बर्बादी पर रोक, पारदर्शिता तथा समय पर रिजल्ट घोषित करने में कारगर साबित हो रहा है. वहीं छात्र-छात्राओं को तकनीक से जोड़कर उसे ग्लोबल भी बनाया जा रहा है. परंतु, भारत की आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करती है, क्या उन लोगों के पास अभ्यास के लिए कंप्यूटर उपलब्ध होगा?
परीक्षाओं के बहाने सरकारी स्कूल-काॅलेजों की गुणवत्ता में भी सुधार करने की जरूरत थी, लेकिन इस परीक्षा ने निजी स्कूल-काॅलेजों की झोली भरनी शुरू कर दी है. वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का जखीरा सब्जेक्टिव प्रश्नों के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है. बच्चों में विषय-वस्तु का ज्ञान, लेखन-शैली तथा सृजनात्मक क्षमता का पतन होता जा रहा है.
सत्यम भारती, वनद्वार (बेगूसराय)
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