क्या खबरें कोफ्त पैदा करती हैं?

Published at :16 Jul 2014 3:31 AM (IST)
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क्या खबरें कोफ्त पैदा करती हैं?

रजनीश आनंद प्रभात खबर, रांची रोज खबरों पर नजर रखते-रखते कुढ़न होने ली थी. इच्छा थी कि किसी ऐसी जगह चली जाऊं जहां कोई खबरों के बारे में न पूछे और मैं कुछ घंटों के लिए ही सही, खबरों से दूर रहूं. मुङो लगा था कि संभवत: ऐसा करने से मैं रिफ्रेश हो जाऊंगी. इसी […]

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रजनीश आनंद

प्रभात खबर, रांची

रोज खबरों पर नजर रखते-रखते कुढ़न होने ली थी. इच्छा थी कि किसी ऐसी जगह चली जाऊं जहां कोई खबरों के बारे में न पूछे और मैं कुछ घंटों के लिए ही सही, खबरों से दूर रहूं. मुङो लगा था कि संभवत: ऐसा करने से मैं रिफ्रेश हो जाऊंगी. इसी सोच के साथ मैं ऑफिस से जल्दी निकली, सीधा अपने दोस्त के घर पहुंचीं. मोहतरमा शिक्षिका हैं. मुङो देखते ही खुशी से मुझसे लिपट गयीं.

इस वार्मवेलकप से मैं गदगद. उम्मीद थी कि अब वह मेरे लिये चाय का प्याला लेकर आयेंगी. लेकिन वो तो मुङो अपनी ही खबर सुनाने लगीं. सास से छुट्टी मिली, तो पड़ोस की खबर. जबरदस्ती दांत निपोरते-निपोरते मैं परेशान. अंतत: मैंने कहा, अब चलती हूं, फिर आऊंगी. उसने मुङो रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं नहीं रुकी. कहां, तो मैं रिफ्रेश होने उसके घर गयी और खीज कर लौटना पड़ा. रास्ते में मेरे चाचा का घर है. बचपन से ही मुङो उनसे काफी स्नेह है, सो मैंने सोचा थोड़ा स्नेह पा लूं और उनके घर की सीढ़ियां चढ़ने लगी. कॉल वेल बजाते ही गायत्री मंत्र के जाप से मन को शांति मिली. दरवाजा मेरे प्रिय चाचा ने ही खोला. मन को और शांति मिली.

चाय की तलब तो हो रही थी, उसपर चाची ने जाते ही चाय और नाश्ता परोस दिया, तो मन भी प्रसन्न हो गया. लेकिन चाय का घूंट मेरे लिये तब कड़वा हो गया, जब चाचा ने कहा और बताओ क्या खबर है? आज कौन-सी खबर तुम लोगों के अखबार में लीड बनने वाली है. मन में कोफ्त तो बहुत हुई, लेकिन जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं था. मैं लगभग एक घंटे वहां रुकी. देश-विदेश की तमाम खबरों के अलावा उन्होंने गंभीर राजनीतिक व सामाजिक मसलों पर भी बात की. पत्रकार को देख लोग किस तरह खबरों के बारे में अपनी समझ का बयां करते हैं, इसकी बानगी मुङो मिली. मेरा मन पूरी तरह से बोझिल हो गया, सो मैं थकावट का बहाना बना कर वहां से निकल भागी, जबकि उन सब की इच्छा थी कि मैं वहां कुछ देर और रुकूं .

खबरों से आजिज आकर मैं तेज कदमों से घर की ओर जा रही थी, तभी पीछे से आवाज आयी, इतनी जल्दी में कहां जा रहीं हैं मोहतरमा. मैं आवाज सुनते ही जान गयी कि मेरे प्रिय मित्र शर्माजी हैं. उनसे मुङो सहानुभूति की उम्मीद भी थी, सो मैंने तुरंत अपना दर्द उनके सामने बयां कर दिया. मेरी बात सुन कर उन्होंने कहा अजीब बात है, जो खबरें कभी आपका जुनून हुआ करती थीं, आप उन्हीं से भाग रही हैं.

अरे भाई, उन्हें इंज्वॉय कीजिए. मैं यह मानता हूं कि एकरसता से जीवन दूभर हो जाता है, लेकिन इसके लिए आप मन की बातों को बयां कीजिए, कुछ लिखिए. उनकी बातों से मुङो बहुत सुकून मिला. मैं ऊर्जा से परिपूर्ण हो गयी और घर की ओर निकल पड़ी. दरवाजा खोलते ही मेरे बेटे ने कहा, पता है मां आज की ताजा खबर क्या है? उसकी बात सुन कर मुङो हंसी आ गयी, लेकिन इस बार खबर की बात सुन कर मैं कुढ़ी नहीं.. खुशी मिली.

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