चुनावी एजेंडा नहीं बन पा रहीं किसानों की समस्याएं

देश में लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण संपन्न हो गया. लेकिन, अभी तक किसानों की मूल समस्या किसी भी राजनीतिक दल का चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है. जबकि, सभी पार्टियां किसानों के हित की बात करती नजर आती हैं. सत्ता में चाहे कोई भी हो आम किसान को उनकी कृषि समस्या ही नजर आती […]
देश में लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण संपन्न हो गया. लेकिन, अभी तक किसानों की मूल समस्या किसी भी राजनीतिक दल का चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है. जबकि, सभी पार्टियां किसानों के हित की बात करती नजर आती हैं. सत्ता में चाहे कोई भी हो आम किसान को उनकी कृषि समस्या ही नजर आती है, जो कमोबेश देश के हर राज्यों में किसान नाखुश नजर आ रहे हैं.
कई बार तो राजनेताओं की अभद्र टिप्पणी तक भी किसानों को सुननी पड़ी है, जिससे किसान की अंतरात्मा को ठेस पहुंचा है. अब बारी चुनाव का आया, तो उन सभी राजनीतिक दल को सबक सिखायेगा. फिर भी किसी राजनीतिक पार्टियां के चुनावी एजेंडे में किसानों के मूलभूत सुविधाएं गायब नजर आ रही हैं.
नितेश, जानपुल चौक (मोतिहारी)
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