अब बढ़ेगी पेंशन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Apr 2019 8:11 AM
पेंशन का मुख्य उद्देश्य यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति अपना जीवन ससम्मान जी सके. लेकिन इसके लिए एक समुचित रकम मिलना भी जरूरी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की एक याचिका को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है. […]
पेंशन का मुख्य उद्देश्य यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति अपना जीवन ससम्मान जी सके. लेकिन इसके लिए एक समुचित रकम मिलना भी जरूरी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की एक याचिका को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है.
यह याचिका केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर की गयी थी, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारी को उसके पूरे वेतन के हिसाब से पेंशन मिलनी चाहिए, न कि 15 हजार की सीमा के अनुरूप. पिछले साल उच्च न्यायालय ने सितंबर, 2014 से लागू सरकारी निर्देश को खारिज कर दिया था.
निर्देश में पेंशन लायक वेतन को निर्धारित करने के मानकों को भी बदला गया था. हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने अक्तूबर, 2016 में ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी समय-सीमा की जरूरत नहीं है और अधिक वेतन पानेवाले कर्मचारी भी पेंशन के लिए योग्य हैं. ईपीएफओ ने इस फैसले के बावजूद नियमों में जरूरी बदलाव नहीं किया. बीते पांच सालों में सर्वोच्च न्यायालय के अलावा अनेक उच्च न्यायालयों ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसले सुनाये हैं.
उम्मीद है कि अब यह खींचतान बंद हो जायेगी और पेंशन व्यवस्था को बेहतर करने की कोशिशें तेज होंगी. एक आकलन के अनुसार निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के पेंशन में 400 से लेकर 1000 फीसदी तक की बढ़त हो सकती है. इसका स्वागत करने के साथ यह भी कहा जाना चाहिए कि सरकार और ईपीएफओ जैसी संस्थाओं को वेतन, भत्ता और पेंशन आदि से जुड़े मसलों को अदालत में ले जाकर समय बरबाद करने से बचना चाहिए.
मौजूदा कर्मचारियों, रोजगार में आ रहे लोगों तथा पेंशन पा रहे कामगारों के हितों को देखते हुए उनकी समीक्षा भी होती रहे. इस प्रक्रिया में सभी संबद्ध पक्षों की सलाह को भी अहमियत दी जानी चाहिए तथा अफरातफरी में नये-नये नियम बनाने की प्रवृत्ति से बचा जाना चाहिए.
हालांकि, मौजूदा प्रकरण निजी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, परंतु हर सेक्टर में पेंशन पर ठोस नीतिगत पहल की जरूरत है. लगभग ढाई दशकों के आर्थिक उदारीकरण के दौर में हमारे देश में संगठित क्षेत्र से अधिक रोजगार असंगठित क्षेत्र में सृजित हुआ है. यह विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है. इससे कामगारों की बड़ी तादाद पर न तो श्रम कानून लागू हो पाते हैं और न ही ऐसे उद्यमों को रोजगार के एवज में मदद मिल पाती है. इनके लिए पेंशन सुनिश्चित कर पाना भी मुश्किल है.
रोजगार, निवेश, बचत और पेंशन का सीधा संबंध आर्थिक विकास और समृद्धि से है. इस वर्ष के बजट में असंगठित क्षेत्र में 15 हजार रुपये से कम आमदनी के लोगों के लिए तीन हजार रुपये पेंशन देने की सराहनीय योजना प्रस्तावित की गयी है. भारत को विकसित बनाने के लिए पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा के उपायों को मजबूती देना बहुत जरूरी है.
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