मोस्ट फेवर्ड नेशन
Updated at : 18 Feb 2019 6:29 AM (IST)
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com स्मार्ट विश्वविद्यालय ने पाकिस्तान विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, उसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है- पाकिस्तान एक कन्फ्यूजन है. वह एक रोजगार योजना है. यूं ही पाकिस्तान अपने को नेशन कहता है. हाल की आतंकी घटना से पहले भारत ने पाकिस्तान को कारोबार वगैरह के […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
स्मार्ट विश्वविद्यालय ने पाकिस्तान विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, उसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है-
पाकिस्तान एक कन्फ्यूजन है. वह एक रोजगार योजना है. यूं ही पाकिस्तान अपने को नेशन कहता है. हाल की आतंकी घटना से पहले भारत ने पाकिस्तान को कारोबार वगैरह के मामले में मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी सबसे वरीयता प्राप्त नेशन का दर्जा दे रखा था. अब यह पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भारत ने वापस ले लिया है.
इस पर पाकिस्तान का बयान आ गया है- भारत का मोस्ट फेवर्ड नेशन भले ही ना रहा हो पाकिस्तान, पर विश्व के आतंकियों को मोस्ट फेवर्ड नेशन सबसे ज्यादा प्रिय नेशन है. अमेरिका में आतंकी वारदातें करके कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में ही आराम करता पाया गया. दाऊद इब्राहीम, हाफिज सईद, मसूद अजहर जैसे आतंकियों का मोस्ट फेवर्ड नेशन अब भी पाकिस्तान ही है.
पाकिस्तान दरअसल रोजगार योजना भी है. जिन्ना को मुल्क की टाॅप पोस्ट पर रोजगार चाहिए था. भारत में इसकी संभावना नहीं दिखी, तो उन्होंने पाकिस्तान बनवा लिया. कालांतर में पाकिस्तान में बहुत जनरलों को दोहरा रोजगार मिला, जो बरास्ता सेना मुल्क की टाॅप पोजीशन पर काबिज हुए.
पाकिस्तान के टाॅप सेना अफसरों को तीन-तीन रोजगार मिल जाते हैं, सेना की अफसरी अलग, पाॅलिटिक्स अलग और बतौर आतंकी कमाई अलग. टाॅप जनरल बड़े नोट पीटते हैं, बेरोजगार नौजवानों को आत्मघाती हमलों का रोजगार दे देते हैं. इस तरह पाकिस्तान अपने आप में एक महारोजगार योजना बना हुआ है.
पाकिस्तान से कई भारतीय नेताओं को भी रोजगार मिलता है. पाकिस्तान पर बयान देकर कई नेता चर्चित हो जाते हैं, टीवी पर आ जाते हैं. पाकिस्तान में आतंक का उद्योग लगभग कुटीर उद्योग की तरह विकसित हुआ है.
पाकिस्तानी फौज के जनरल पढ़-लिख कर अंग्रेजी में आतंक करते हैं और कम पढ़े-लिखे पंजाबी, उर्दू, पश्तो और बलूच में आतंक मचाते हैं. जो जहां है, वह अपना योगदान दे रहा है. फौज के जनरल के बच्चे अमेरिका में पढ़-लिख कर वहीं सैटल हो जाते हैं, लेकिन गरीब पाकिस्तानी आतंकी बनकर कब्र में सेटल हो जाते हैं.
पाकिस्तान एक विशाल रोजगार योजना है. टीवी चैनलों पर लंबे समय तक पाकिस्तान मचा रहता है. एंकर रातों-रात सैन्य विशेषज्ञ हो जाते हैं और स्क्रीन पर ही बताने लगते हैं कि राफेल जहाज ऐसे उड़ेगा और ऐसे लाहौर-कराची पर बमवर्षा करके लौट आयेगा.
कोई उन्हें बताये कि भाई इतने टेक्निकल मसले हैं, डिफेंस के संवेदनशील मामले हैं, इस तरह टीवी पर बैठकर तय नहीं हो सकते. पर इन दिनों कोई उन्हें रोक नहीं सकता. वे राफेल पर उड़ कर कराची पर बम गिरा आयेंगे, फिर वज्र टैंक में बैठ कर स्टूडियो से इस्लामाबाद उड़ा देंगे. चौबीस घंटे युद्ध का रोजगार टीवी चैनलों को भी मिल गया है. इस तरह कह सकते हैं कि पाकिस्तान एक सतत रोजगार योजना है.
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