बेमानी होंगी अधिक उम्मीदें

Updated at : 28 Sep 2018 7:48 AM (IST)
विज्ञापन
बेमानी होंगी अधिक उम्मीदें

टीएम थॉमस आइजैक वित्त मंत्री, केरल editor@thebillionpress.org बीते 23 सितंबर को प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की शुरुआत की गयी, जिसे कई लोगों ने विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया है. पिछली बीमा योजनाओं से प्राप्त अनुभवों एवं इस योजना को लेकर उपजे भ्रमों की वजह से अभी इससे […]

विज्ञापन
टीएम थॉमस आइजैक
वित्त मंत्री, केरल
editor@thebillionpress.org
बीते 23 सितंबर को प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की शुरुआत की गयी, जिसे कई लोगों ने विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया है.
पिछली बीमा योजनाओं से प्राप्त अनुभवों एवं इस योजना को लेकर उपजे भ्रमों की वजह से अभी इससे ज्यादा उम्मीदें करना गैरजरूरी है. यह योजना इस सरकार द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में लागू की गयी है, जब उसके पास इसे लेकर किये जा रहे दावों की सत्यता सिद्ध करने का वक्त नहीं बचा है.
सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के एक प्रभावी नेटवर्क के माध्यम से सर्वव्यापी स्वास्थ्य-चर्या उपलब्ध करने में विफलता की वजह से हमारे नीति-निर्माताओं के बीच बीमा आधारित स्वास्थ्य-चर्या प्रणालियों को लेकर एक दिशाहीनता रही है. इससे हमारी 70 प्रतिशत से भी अधिक आबादी को निजी क्षेत्र पर निर्भर होना पड़ा है, जिनकी ऊंची लागतों ने उचित स्वास्थ्य-चर्या को अधिकतर लोगों की क्षमता से बाहर कर दिया. इस निराशाजनक स्थिति का सबसे अहम कारण सार्वजनिक निवेश की कमी रहा है. यहां केंद्र तथा राज्य सरकारों को मिलाकर स्वास्थ्य पर कुल सरकारी व्यय जीडीपी का 1.1 है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) द्वारा अनुशंसित 04 प्रतिशत से बहुत कम है. नतीजा, स्वास्थ्य खर्चों का बहुत बड़ा हिस्सा लाभुकों को अपनी जेब से वहन करना पड़ता है.
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2008 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ (आरएसबीवाइ) की शुरुआत की गयी, जिसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) की पूरी आबादी के अस्पतालों में भर्ती होने पर उनकी चिकित्सा पर 30,000 रुपये तक के खर्चे बीमा कंपनियों द्वारा उठाया जाना था, पर इस योजना का न सिर्फ आच्छादन घटिया रहा, बल्कि बीमित रोगियों द्वारा हासिल लाभ भी बहुत कम ही रहा.
बीते एक दशक के दौरान बीमा कंपनियों ने केवल 120 लाख दावे निबटाये, जिनमें 53 लाख दावे अकेले केरल से थे. स्पष्ट था कि इस योजना का लाभ लाभुकों से अधिक बीमा कंपनियों ने ही उठाया. केरल ने इस योजना को सावधानी से इस तरह परिवर्धित किया, ताकि इससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली कमजोर न हो. नतीजा, निबटाये गये दावों में 80 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के ही पाले आये.
केरल में आरएसबीवाइ के तहत कुल 21.6 लाख परिवारों के नामांकन हुए. इसके अतिरिक्त, सरकार ने अपनी निधि से भी 19.4 लाख गैर-बीपीएल परिवारों के नामांकन कराये. इसके अलावा, इन सभी 41 लाख परिवारों के लिए कुछ चयनित चिकित्सा क्रियाओं हेतु सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली द्वारा दो लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी गयी.
इस तरह केरल में इस योजना का एक मिश्रित स्वरूप लागू हुआ. कुछ अन्य राज्यों ने भी इसको कुछ इसी तरह लागू किया.इस नयी योजना (एबी-पीएमजेएवाइ) में भी बीमा प्रीमियम की लागत केंद्र एवं राज्य सरकारें 60 और 40 के अनुपात में साझा करेंगी. पहली योजना में एलिजिबल प्रीमियम सीमा रुपया 1250 (परिवार में प्रति वरीय नागरिक हेतु "30,000 के अतिरिक्त लाभ के लिए "500 समेत) थी. अभी तक नयी योजना में प्रीमियम सीलिंग की आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है, पर जो संकेत मिले हैं, उसके अनुसार इसके रुपये 1,100 होने की संभावना है.
इसका अर्थ यह हुआ कि नयी योजना में केंद्र का कुल अंशदान पुरानी योजना से नीचा रहेगा. नियमानुसार, केंद्रीय सहायता खुली टेंडरिंग प्रक्रिया के द्वारा निर्धारित वास्तविक प्रीमियम के भारत सरकार द्वारा तय अनुमानित प्रीमियम तक ही सीमित रहेगी.
हमारे पास प्रत्याशित स्वास्थ्य घटनाओं तथा उनके विभिन्न उपचारों की लागतों को लेकर कोई डाटाबेस उपलब्ध नहीं है, पर बीमा कंपनियों के साथ चर्चा से यह पता चलता है कि केरल में यह प्रीमियम लागत "5,000 से लेकर "7,000 तक हो सकती है. इस वास्तविक प्रीमियम लागत में केंद्र का अंशदान मात्र "660 (रुपये 1,100 का 60 प्रतिशत) तक ही सीमित रहेगा. इस योजना में नामांकन हेतु केरल के योग्य लाभुकों की संख्या सिर्फ 18.5 लाख है.
पुरानी योजना के 41 लाख लाभुकों में से किसी को भी नयी योजना से बाहर नहीं कर सकते. ऐसे में उनके प्रीमियम का भार राज्य सरकार को ही वहन करना पड़ेगा. केरल को स्वास्थ्य-चर्या के लिए अतिरिक्त राशि के वहन में कोई गुरेज नहीं है. केरल स्वास्थ्य क्षेत्र को भारत के अन्य किसी भी राज्य से काफी अधिक संसाधन आवंटित करता रहा है, पर कुछ मुद्दों पर तो नजरिया साफ करना ही होगा.
जब इस बीमा भार के 80-85 प्रतिशत का वहन राज्य सरकार को ही करना है, तो किस अर्थ में इसे एक केंद्र प्रायोजित योजना की संज्ञा दी जा रही है?
क्या यह उचित नहीं होगा कि इस योजना के वित्तभार के वहन हेतु पारदर्शी विमर्श किया जाये? क्या इस योजना को प्रत्येक राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की पर्याप्त गुंजाइश नहीं होनी चाहिए?
समग्र स्वास्थ्य बजट में तदनुरूप इजाफे के बगैर बीमे की ऊंची लागत का नतीजा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए पहले ही से स्वल्प बजटीय प्रावधानों में और भी कमी के रूप में सामने आयेगा और उसकी यह अनदेखी उसे लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंचा देगी. मुफ्त तथा सर्वव्यापी स्वास्थ्य-चर्या मुहैया करने हेतु 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र के वादे बजटीय प्रावधानों के आधार बगैर खोखले ही हैं.
गौरतलब है कि हालिया केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य तथा सामाजिक क्षेत्रों के लिए आवंटन को कम किया गया है. पूरी संभावना यह है कि अधिकतर राज्य सरकारें बीमा और इंश्योरेंस प्रणाली की एक मिश्रित किस्म लागू करने जा रही हैं, जो द्वितीयक एवं तृतीयक सार्वजनिक क्षेत्र में पर्याप्त निवेश की अनुपस्थिति में निजी क्षेत्र के अति संपन्न अस्पतालों को ही अनुदानित करेगी. दीर्घावधि में इससे प्रीमियम लागत में इजाफे एवं आच्छादन में कमी के ही खतरे सामने आयेंगे.
जिसे विश्व के सबसे बड़े सामाजिक स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम की संज्ञा दी जा रही है, उसके अंतर्गत उसकी पूर्ववर्ती योजना की ही भांति लक्ष्य से कहीं कम आच्छादन होगा, रोगियों की बजाय बीमा कंपनियां व निजी अस्पताल फायदे उठायेंगे और देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और भी कमजोर होगी. इस नयी योजना के उचित आकलन हेतु अभी कुछ वर्षों का इंतजार करना ही होगा.
(अनुवाद: विजय नंदन)
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola