भारत बंद समाधान नहीं

Updated at : 26 Sep 2018 7:52 AM (IST)
विज्ञापन
भारत बंद समाधान नहीं

पिछले कई महीनों से भारत बंदी में बढ़ोतरी हुई है. नेताओं और जनता पर एक अलग ही क्रेज चढ़ा है. ऐसी बात नहीं है कि पहले भारत बंद नहीं होता था, लेकिन अब जिस तरह से हो रहा है, महीने में दो-तीन बार, ऐसा पहले नहीं होता था. लोकतांत्रिक देश में सरकार का विरोध शांति […]

विज्ञापन
पिछले कई महीनों से भारत बंदी में बढ़ोतरी हुई है. नेताओं और जनता पर एक अलग ही क्रेज चढ़ा है. ऐसी बात नहीं है कि पहले भारत बंद नहीं होता था, लेकिन अब जिस तरह से हो रहा है, महीने में दो-तीन बार, ऐसा पहले नहीं होता था.
लोकतांत्रिक देश में सरकार का विरोध शांति व अहिंसक रूप से कर सकते हैं, लेकिन पिछले भारत बंदी में जो नजारा देखने को मिला है, वह चिंता करने योग्य है, क्योंकि हर बार बंद ने हिंसक रूप ले लिया है.
हिंसा से बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक नुकसान होता है. विकासशील देशों के लिए यह गंभीर समस्या है. लगातार हाे रहे भारत बंद से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत बंद एक राष्ट्रीय त्योहार बन गया है. भारत बंद से न केवल वयस्क नागरिकों, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इससे किसी का भला नहीं होनेवाला.
दिवाकर दास, मधुपुर
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola