एआई क्या कर लेगी!
Updated at : 01 Aug 2018 11:45 PM (IST)
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संतोष उत्सुक व्यंग्यकार santoshutsuk@gmail.com घबरायें नहीं. एआई किसी आतंकवादी या सामूहिक पिटाई करो ग्रुप का नाम नहीं है. यह हैरान कर देनेवाला मानवीय आविष्कार है, जो दुनिया बदलनेवाला है. हम सबने सृष्टि की अदभुत रचना, मनुष्य की नैसर्गिक बुद्धि के क्रियाकलाप तो खूब देख लिये. ज्यादा बुद्धि वालों ने कम बुद्धि वालों को जमकर ठगा. […]
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संतोष उत्सुक
व्यंग्यकार
santoshutsuk@gmail.com
घबरायें नहीं. एआई किसी आतंकवादी या सामूहिक पिटाई करो ग्रुप का नाम नहीं है. यह हैरान कर देनेवाला मानवीय आविष्कार है, जो दुनिया बदलनेवाला है. हम सबने सृष्टि की अदभुत रचना, मनुष्य की नैसर्गिक बुद्धि के क्रियाकलाप तो खूब देख लिये. ज्यादा बुद्धि वालों ने कम बुद्धि वालों को जमकर ठगा. कुदरत को इतना अधिक नुकसान पहुंचाया कि कुदरत बदला लेने पर विवश हो गयी. तो क्या अब एआई पर ही भरोसा टिकाना पड़ेगा?
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम होशियारी) हमारे जीवन का नया संबल बनने की ओर अग्रसर है. विश्व प्रसिद्ध माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने अमेरिका में पिछले दिनों फरमाया है कि एआई हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर व रिटेल में प्रयोग हो सकती है. यह हमारी जिंदगी बदल देगी. क्या हमारी जिंदगी में कम बदलाव आये हैं, खैर.
मुझे लगता है अगर यह बात उन्होंने भारत में कही होती तो यहां के इंटेलिजेंट लोग उन्हें न जाने क्या-क्या कहते. हमारे अस्पतालों में बुद्धिमत्ता से मरीजों का इलाज किये जाने का स्वर्णिम इतिहास है. भूख से मरनेवालों का पोस्टमार्टम ईमानदारी से दो बार किया जाता है और मरने का कारण भूख ही निकाला जाता है. नैसर्गिक होशियारी से प्रेरित हो संभावित बीमारी का ऑपरेशन भी एडवांस कर दिया जाता है.
कई अस्पतालों में लाशों को कई-कई दिन संभालकर रखा जाता है. क्या होशियारी को बुद्धि कह सकते हैं? एक दिन एआई न्यू इंडिया में जरूर पधारेगी. तब स्वास्थ्य चिंतकों की चिंता को काफी नुकसान होगा. यदि ऑपरेशन भी एआई करने लग गयी, तो फिर डाॅक्टर क्या करेंगे? दिमाग कहता है कि हमारे सर्जन एआई की बुद्धि का ही ऑपरेशन कर डालेंगे.
राजनीति में एआई घुस गयी, तो नेताओं की दशकों की मेहनत पर पानी फिर जायेगा. उनके सारे पैंतरे डूब जायेंगे और उनकी नैसर्गिक होशियार प्रतिभा धूमिल हो जायेगी.
तब उनके इरादों, वायदों, चक्रव्यूहों और खुराफातों का क्या होगा! सभी दागी नेताओं को कितनी महान प्रतिभाओं ने निरंतर मेहनत से बचा रखा है! क्या एआई सबको एक झटके में ही सलाखों के पीछे फेंक देगी! नहीं, मुझे विश्वास है हमारे रोम-रोम में विचरित धर्म, जाति और धन ऐसा नहीं होने देंगे. शर्तिया कोई जुगाड़ भिड़ा देंगे और हमारी नैसर्गिक होशियारी एआई को ठग लेगी.
शिक्षा क्षेत्र में एआई के आने पर हंगामा मच जायेगा. सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को हुक्म जारी होगी कि इनके बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे. किसी का भी तबादला नैसर्गिक, राजनीतिक या धन के आधार पर नहीं होगा.
लगता नहीं कि ऐसा सपने में भी होगा. हमारे देश में 99 प्रतिशत लोग विंडो का अवैध वर्जन धड़ल्ले से प्रयोग करते हैं. माइक्रोसॉफ्ट इन्हें ही सुधार ले, तो हम एआई का जलवा मान लेंगे. एआई क्या नैसर्गिक होशियारी से ज्यादा समझदार, ईमानदार, फुर्तीली व पारदर्शी होती है? क्या होशियारी को प्रतिभा कह सकते हैं? क्या हमारी नैसर्गिक प्रतिभा का कत्ल होनेवाला है?
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