बेटी की पुकार

Updated at : 16 Apr 2018 7:46 AM (IST)
विज्ञापन
बेटी की पुकार

आज देश में जो हो रहा है, उसे देख तो बेटियां यही बोलेंगी, ‘अच्छा होता, हमें भ्रूण में ही मार देते’. ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि देश में बलात्कार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं. अगर बेटी नहीं होती, तो शायद बलात्कार की घटना भी नहीं होती, पर क्या यह संभव है? हमारी […]

विज्ञापन
आज देश में जो हो रहा है, उसे देख तो बेटियां यही बोलेंगी, ‘अच्छा होता, हमें भ्रूण में ही मार देते’. ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि देश में बलात्कार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं.
अगर बेटी नहीं होती, तो शायद बलात्कार की घटना भी नहीं होती, पर क्या यह संभव है? हमारी मां, बहनें, बेटियां, सहेलियां, पत्नी सभी पहले बेटी ही होती हैं. अगर उनको जन्म ही न दिया जाये, तो क्या जीवन संभव है? समझ नहीं आता आखिर क्या हो गया है लोगों को?
क्या मिलता है इंसानियत को शर्मसार करके? उनको भी जीवन देने वाली उनकी मां एक बेटी ही है. किसी मासूम की जिंदगी बर्बाद करके उन्हें कैसा सुकून मिलता है? आज हर बेटी यही पुकार रही है कि आखिर उनकी गलती क्या है, जो उनके साथ ऐसा किया जाता है?
ओमकार कुशवाह, हजारीबाग
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola