सामुद्रिक सहयोगी बना सेशेल्स

Updated at : 12 Apr 2018 5:26 AM (IST)
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सामुद्रिक सहयोगी बना सेशेल्स

II नेहा सिन्हा II रिसर्च एसोसिएट, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन nsinha.rnc@gmail.com सेशेल्स गणराज्य के आधिकारिक नाम से जाना जानेवाला सेशेल्स अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 1,500 किमी पूर्व दिशा में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में स्थित 115 द्वीपों का एक समूह है, जो विश्व के उम्दा सैरगाहों में शुमार है. कुल 459 वर्ग किमी […]

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II नेहा सिन्हा II

रिसर्च एसोसिएट, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन

nsinha.rnc@gmail.com

सेशेल्स गणराज्य के आधिकारिक नाम से जाना जानेवाला सेशेल्स अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 1,500 किमी पूर्व दिशा में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में स्थित 115 द्वीपों का एक समूह है, जो विश्व के उम्दा सैरगाहों में शुमार है.

कुल 459 वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ यह न केवल रकबे में, बल्कि महज 96 हजार की जनसंख्या के साथ आबादी के लिहाज से भी अफ्रीका महादेश का सबसे छोटा देश है. इसके अधिकतर द्वीप पूरी तरह निर्जन मगर प्राकृतिक संसाधनों से पटे पड़े हैं. माहे इसका सबसे बड़ा द्वीप है, जहां इसकी 81 प्रतिशत आबादी निवास करती है और सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया भी यहीं स्थित है.

हमारे देश के केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी से कुछ ही छोटा यह देश पुदुचेरी की ही तरह फ्रांसीसी आधिपत्य में रह चुका है, जो 1814 में ब्रिटेन द्वारा नेपोलियन की पराजय के बाद ब्रिटेन का अधीनस्थ हो गया.

1976 में इसे ब्रिटेन से आजादी मिली और आज यह संयुक्त राष्ट्र के ही साथ दक्षिण अफ्रीका विकास समुदाय, राष्ट्रमंडल तथा अफ्रीकी संघ का भी सदस्य है. सेशेल्स के दुग्ध धवल सागरतटों के साथ ही शांत समंदर के स्वच्छ एवं हरित-नील विस्तार का अनुपम सौंदर्य सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है, जिसने हाल ही इसे विश्व के बीस सर्वोत्तम वैवाहिक-गंतव्यों में एक का खिताब दिलाया है.

यों तो सेशेल्स के साथ भारत के औपचारिक संबंध उसकी आजादी के तुरंत ही बाद शुरू हो गये, पर उसके पहले भी दोनों के बीच रिश्ते कायम थे. वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे के साथ ही इन संबंधों को एक नयी दिशा मिली थी.

तब दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को लेकर एक करार पर हस्ताक्षर तो हुए, पर सेशेल्स के तत्कालीन राष्ट्रपति जेम्स मिशेल के नेतृत्ववाली संसद से उसकी पुष्टि न हो सकी. अगस्त, 2017 में वर्तमान राष्ट्रपति डैनी फॉरे के इस बयान के साथ ही कि इस करार पर दोबारा बात करनी होगी, यह साफ हो चुका था कि दोनों के बीच एक बार फिर गहन चर्चा जरूरी होगी.

अंततः 27 जनवरी, 2018 को भारत के तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर और सेशेल्स के विदेश मंत्री बेरी फॉरे ने एक पुनरीक्षित करार पर दस्तखत किये, जिसके अनुसार भारत को इस द्वीप समूह से 1,440 किमी दक्षिण-पश्चिम स्थित अजंपशन द्वीप पर सैन्य अवसंरचना स्थापित कर विभिन्न सुविधाओं के विकास, प्रबंधन, संचालन तथा रख-रखाव की अनुमति मिलेगी.

इस नये करार में मुख्य जोर लगभग 13 लाख वर्ग किमी में फैले सेशेल्स के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सामुद्रिक निगरानी हेतु सैन्य सामर्थ्य बढ़ाने पर था. इस अवसर पर जयशंकर ने कहा कि सामुद्रिक पड़ोसी होने के नाते एक दूसरे की सुरक्षा में सेशेल्स तथा भारत के हित न्यस्त हैं.

इसलिए अब दोनों संयुक्त रूप से सामुद्रिक डाके (पायरेसी) निरोधी कार्रवाईयों और इस क्षेत्र में संभावित आर्थिक अपराधियों की घुसपैठ के विरुद्ध गहनतर निगरानी के साथ ही गैरकानूनी ढंग से मछलियां पकड़ने तथा सामुद्रिक जंतुओं का शिकार करनेवालों और मादक पदार्थों एवं मानव व्यापार में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाइयों में सहयोग कर सकेंगे.

इस तरह इस करार को भारतीय नौसेना की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जो अजंपशन द्वीप से अपनी नौसैनिक सुविधाओं का संचालन कर सकेगी. जैसा सेशेल्स की रक्षा सेनाओं के प्रमुख ने कहा- ‘अजंपशन द्वीप पर तटरक्षकों के लिए वैसे आधुनिक उपकरण भी स्थापित होंगे, जो उन्हें इस पर अपने पोत और विमान रखने की सुविधाएं मुहैया कर सकेंगे.’

इस करार को भी संपुष्टि के लिए सेशेल्स के मंत्रिमंडल और उसकी संसद के समक्ष रखा जायेगा, जिसके बाद ही इस तरह की सारी सुविधाएं स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकेगी.

हालांकि, इस परियोजना का पूरा वित्तीय भार भारत सरकार उठायेगी, मगर इस अड्डे पर सेशेल्स का पूर्ण स्वमित्व होगा. इसके साथ ही उसे यह भी अधिकार होगा कि वह कोई महामारी फैलने अथवा भारत के किसी युद्ध में शामिल होने की स्थिति में इस अड्डे का सैन्य उपयोग रोक या स्थगित कर दे, क्योंकि यह कोई सैन्य अड्डा नहीं है.

इसके अतिरिक्त, इस सुविधा तक भारत सरकार की पहुंच तो होगी, पर इसे परमाण्विक हथियारों के परिवहन अथवा उनके भंडारण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.

सेशेल्स में भारतीय मूल के लगभग दस हजार निवासी हैं, जो यहां आनेवाले सबसे पहले लोगों में शामिल थे. ये मुख्यतः तमिलनाडु तथा गुजरात से आये थे. पहले तो ये लोग व्यवसायियों, श्रमिकों तथा निर्माण मजदूरों के रूप में यहां आये, पर अब वे पेशेवरों के रूप में भी आ रहे हैं.

इस हालिया करार ने न केवल दोनों के संबंधों को खासी मजबूती दी है, बल्कि इसे घोषित स्तर के मुकाम तक भी पहुंचाया है. इससे आगे भारत को वहां हवाई पट्टी और नौकाओं की गोदी के निर्माण में भी मदद मिलेगी. सेशेल्स के साथ ही मॉरिशस के अगलेगा द्वीप पर ऐसी सुविधाओं की स्थापना से पश्चिमी हिंद महासागर भारत के लिए पहुंच के दायरे में आ जायेगा.

(अनुवाद: विजय नंदन)

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