गांधीजी का अधूरा स्वप्न

Updated at : 26 Jan 2018 6:49 AM (IST)
विज्ञापन
गांधीजी का अधूरा स्वप्न

गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय पर्व हमें नव ऊर्जा संचित कर राष्ट्र-कल्याण की प्रेरणा देते हैं. दिल्ली और देश के प्रांतो की राजधानियों में तिरंगा फहराकर भव्य समारोह आयोजित कर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते है, यह उचित नहीं है. आज गणतंत्र दिवस है. इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाते […]

विज्ञापन

गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय पर्व हमें नव ऊर्जा संचित कर राष्ट्र-कल्याण की प्रेरणा देते हैं. दिल्ली और देश के प्रांतो की राजधानियों में तिरंगा फहराकर भव्य समारोह आयोजित कर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते है, यह उचित नहीं है. आज गणतंत्र दिवस है.

इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाते है. महात्मा गांधी और तत्कालीन गणमान्य राष्ट्र नेताओं के विचारों के आशादीप उन्हीं के साथ बुझ गये हैं. स्वराज्य तो आया, मगर सुराज नहीं आया. गांधीजी के रामराज का सपना उनकी मृत्यु के साथ ही नष्ट हो गया. हम उजाले के लिए निकले और अंधेरा ले आये, तो यह दोष किसका है? जोश में हम होश भूल गये. यह अवसर है एक बार फिर से उस सपने को साकार करने का प्रयास शुरू करें. और एक खुशहाल राष्ट्र के रूप में भारत को विश्व पटल पर पहचान दिलायें.

कांतिलाल मांदोत, इमेल से

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola