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patna

  • Oct 1 2017 7:51PM

बिहार में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, साथ-साथ निकला ताजिया और विसर्जन जुलूस, देखें वीडियो

बिहार में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, साथ-साथ निकला ताजिया और विसर्जन जुलूस, देखें वीडियो

पटना : बिहार में गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा राजधानी समेत कई जिलों में देखने को मिला. एक ओर जहां हिंदू समुदाय की महिलाओं ने अश्रुपूरित आंखों से मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए विदाई दी, वहीं दूसरी ओर मुसलिम समुदाय के लोग भी मातमी जुलूस में शामिल हुए. सहरसा में वर्षों से चली आ रही परंपरा को धरोहर बताते हुए ताजिया और प्रतिमा विसर्जन का जुलूस साथ-साथ चला. वहीं, गोपालगंज में मुसलिम थानेदार की बेगम समेत समुदाय के कई युवा दुर्गापूजा की तैयारी में अपना योगदान दिया. दुर्गापूजा में थानेदार की बेगम ने न सिर्फ सपरिवार शिरकत कीं, बल्कि हवन-पूजन सहित आरती और मंगलाचरण में भी शामिल हुईं. साथ ही उन्होंने दुर्गा के चरणों में सोने का टीका भी अर्पित किया.

पटना : पटना सिटी में पूजा पंडाल के सामने मातम मनाते मुसलिम समुदाय, दिया भाईचारे का पैगाम

करबला के शहीदों का दर्द सुनते गमगीन मंजर के दरमियान जायरीनों की नम आंखें के बीच जब आलमगंज से निकला मातमी जुलूस जब त्रिपोलिया के समीप पहुंचा, तो वहां पर स्थापित देवी प्रतिमा स्थल पर बज रहे धार्मिक संगीत को आयोजकों ने बंद करते हुए गमगीन जुलूस को गुजरने का मार्ग बनाया. यह दृश्य अकेले त्रिपोलिया की नहीं थी, बल्कि बौली इमामबाड़ा से निकले जंजीरी मातम के जुलूस का भी थी. जुलूस निकलने के दरमियान देवी प्रतिमाओं को कतार में अशोक राजपथ पर चौक मोड़ से खड़ा किया जा रहा था. ताकि, जुलूस का कर्बला पहुंचने के बाद विसर्जन कराया जा सके. जब नवाब बहादुर रोड से शिया समुदाय की ओर से मामती जुलूस निकाला गया, तो उस समय भी सड़कों पर दर्जनों की संख्या में प्रतिमा विसर्जन को निकली थी. ऐसे में विसजर्न में विघ्न नहीं आये, इसके लिए शिया समुदाय की ओर से गलियों का मार्ग पकड़ जुलूस नौजर कटरा इमामबाड़ा लाया गया. दरगाह चमडोरिया के सचिव शाह जौहर इमाम जौनी, तनवीरूल हसन तन्नू व इमाम सरवर इमाम बताते है कि बीते दो वर्षो से देवी प्रतिमा के विसर्जन जुलूस को लेकर मातमी जुलूस का समय बदल देते है या फिर मार्ग, ताकि भाईचारे व आपसी सौहार्द के बीच त्योहार मनाया जा सके. जुलूस में शामिल अंजुमन के लोग नौहाखानी करते और मर्सिया पढ़ते हुए चल रहे थे.

सहरसा : पंचगछिया में वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी बरकरार



सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश करते हुए मां दुर्गा की प्रतिमा और ताजिया का एक साथ जुलूस निकाला गया. एक ओर जहां दुर्गा प्रतिमा के जुलूस को लेकर हिंदुओं की टोली आगे बढ़ रही थी, वहीं दूसरी ओर मुसलिम भाई भी ताजिये के साथ-साथ चल पड़े. लोग आपसी भाईचारे और अमन चैन का पैगाम दे रहे हैं. बिहरा थाना प्रभारी सुमन कुमार भी इस नयी परिस्थिति को देख कर स्तब्ध दिखे. वहीं, ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस कर्मियों को मुस्तैद भी करते रहे. लेकिन, भीड़ कहां मनानेवाली थी, वह तो पूरे जोश-खरोश के साथ आगे बढ़ती ही जा रही थी. सांप्रदायिक सौहार्द्र का उन्माद परवान पर था. मौलाना उस्मान ने कहा कि पुश्तों से साथ-साथ रहे हैं, फिर वैमनस्य कैसा? मुसीबत में आवाज लगाता हूं, तो पड़ोसी सबसे पहले आता है. दुर्गा मां की पूजा जिस खानदान द्वारा संपन्न की जाती है, उसके वारिस अनिल कुमार सिंह ने कहा कि प्रशासन नाहक परेशान है. हम सब अस्तित्व में जीते रहे हैं. एक-दूसरे का सम्मान ही हमारी फितरत है. जुलूस को सम्हालने में दिलीप सिंह, पूर्व मुखिया पवन महतो, वशिष्ठ सिंह, मो लुकमान, बेदा सिंह, प्रिंस सिंह, मो सईद, शारदानंद सिंह, धर्मेंद्र नारायण सिंह, मो मजीद, मो शमीम, राजन, ललन आदि शामिल थे.

गोपालगंज : शमीमा ने परिवार संग की पूजा, मां के चरणों में अर्पित किया सोने का टीका

गोपालगंज के बरौली में आयोजित दुर्गापूजा में मुस्लिमों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. वहीं, हिंदुओं ने भी मुहर्रम का मातम साथ-साथ मनाया. बढ़ेया मोड़ स्थित पंडाल में एकता की मिसाल कायम की. बरौली बाजार में बने पूजा-पंडालों को सजाने-संवारने से लेकर पूजा के आखिरी दिन तक मो आरिफ, अब्दुल कलाम सहित दर्जनों मुस्लिम युवाओं ने योगदान किया. बरौली थानाध्यक्ष मो खलील और उनकी बेगम शमीमा खलील ने मंदिर की रंगाई-पुताई से लेकर पूजा में लगनेवाले सामान की पूरी व्यवस्था की. थानेदार की पत्नी ने अपने बच्चों के साथ न केवल पूजा में शिरकत की, बल्कि हवन-पूजन सहित आरती और मंगलाचरण में भी शामिल हुईं. उन्होंने मां दुर्गा के चरणों में सोने का टीका भी अर्पित किया़

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