नवादा के सद्भावना चौक और पुल पार बने अवैध बस पड़ाव, बुधौल बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा

Author Bablu kumar|Edited by Vikash Jha
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फ़ोटो कैप्शन-सद्भावना चौक पर खड़ी वाहन | Prabhat Khabar Network

सद्भावना चौक पर खड़ी वाहन | Prabhat Khabar Network

नवादा का करोड़ों की लागत से बना बुधौल बस स्टैंड आज भी उपयोग की राह देख रहा है. निजी बस संचालक नियमों की अनदेखी कर शहर को जाम में फंसा रहे हैं. जानें क्यों सुविधाओं से लैस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा है.

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Nawada News: नवादा शहर को जाम से राहत दिलाने और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया बुधौल बस स्टैंड आज भी अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहा है. जिला प्रशासन के बार-बार निर्देश और सख्ती के दावों के बावजूद निजी बस संचालक खुलेआम आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं. नतीजा यह है कि सद्भावना चौक और पुल पार का इलाका आज भी अवैध बस पड़ाव के रूप में संचालित हो रहा है, जबकि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बुधौल बस स्टैंड दिनभर वीरान पड़ा रहता है.

सद्भावना चौक और पुल पार पर ही बसों का जमावड़ा

सुबह से देर शाम तक अधिकांश निजी वाहन सद्भावना चौक और पुल पार पर ही खड़ी रहती हैं. यहीं से यात्रियों को बैठाया और उतारा जाता है. सड़क किनारे बसों के रुकने से रोजाना जाम की स्थिति बनती है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही. यात्री भी समय बचाने के लिए इसी अवैध पड़ाव से यात्रा करना अधिक सुविधाजनक मानते हैं.

डीएम के आदेश का नहीं दिख रहा असर

जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने कई बार निर्देश दिया कि जिले की सभी निजी वाहनों का परिचालन केवल बुधौल बस स्टैंड से किया जाए. चेतावनी भी दी गई कि आदेश की अवहेलना करने वाले संचालकों की अनुज्ञप्ति रद्द की जा सकती है. कुछ दिनों तक बसों का संचालन स्टैंड से शुरू भी किया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से संचालकों का मनोबल बढ़ गया और व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई.

दूरी और खराब संपर्क मार्ग बनी बड़ी बाधा

बुधौल बस स्टैंड शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर है. मंगरबिगहा होकर जाने वाला संपर्क मार्ग जर्जर है. सद्भावना चौक से बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त ऑटो किराया भी देना पड़ता है. ऐसे में लोग सीधे सड़क किनारे खड़ी बसों में बैठना अधिक आसान समझते हैं.

सुविधाएं मौजूद, लेकिन उपयोग शून्य

बुधौल बस स्टैंड पर प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बसों का नियमित परिचालन नहीं होने से इनका लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा  दूसरी ओर, सद्भावना चौक और पुल पार पर किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा नहीं होने के बावजूद वहीं सबसे अधिक भीड़ रहती है.

कार्रवाई नहीं हुई तो नहीं बदलेगी तस्वीर

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सद्भावना चौक और पुल पार से अवैध बस परिचालन पर सख्ती से रोक नहीं लगेगी और नियम तोड़ने वाले संचालकों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बुधौल बस स्टैंड महज शोपीस बना रहेगा. शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का वास्तविक लाभ दिलाने के लिए प्रशासन को अब केवल आदेश नहीं, बल्कि प्रभावी कार्रवाई भी करनी होगी.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

परिवहन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने कहा कि जिले में संचालित सभी अवैध बस पड़ावों की जांच कराई जाएगी. जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.


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