Weather Updates: फरवरी में मई-जून जैसी गर्मी! बारिश में भी आएगी कमी, मौसम ऐसे लेगी करवट

Published by : Pritish Sahay Updated At : 31 Jan 2025 10:43 PM

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Weather Updates

Weather Updates: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान जाहिर किया है कि फरवरी में गर्मी औसत से ज्यादा पड़ेगी. विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि फरवरी में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान के साथ-साथ सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

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Weather Updates: जनवरी महीने में कड़ाके की सर्दी के बदले देश के कई हिस्सों में गर्मी पड़ने लगी. न्यूनतम तापमान कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है. जनवरी महीने में बारिश में भी कमी आई है. 15 जनवरी के बाद से उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान में लगातार इजाफा होता गया. देश की राजधानी दिल्ली में भी दिन में तापमान में काफी इजाफा हो गया है. राष्ट्रीय राजधानी में न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक है. मौसम विभाग का अनुमान है कि फरवरी में भी बारिश औसत से काफी कम होगी.

सामान्य से कम होगी बारिश- मौसम विभाग

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि पश्चिम-मध्य, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में फरवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का पूर्वानुमान जाहिर किया है. महापात्रा ने यह भी कहा कि इसी तरह पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है.

2001 के बाद तीसरी बार दर्ज की गई सबसे कम बारिश

पीटीआई के मुताबिक, मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि भारत में जनवरी में औसतन 4.5 मिलीमीटर बारिश हुई. यह 1901 के बाद से चौथी बार और 2001 के बाद तीसरी बार सबसे कम बारिश दर्ज की गयी. जनवरी में देश का औसत तापमान 18.98 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद से इस महीने का तीसरा सबसे अधिक तापमान था. इससे पहले आईएमडी ने पूर्वानुमान जाहिर किया था कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तर भारत में सामान्य वर्षा से कम होगी.

फसलों के लिए अहम होती है सर्दी की बारिश

सर्दी की बारिश कई फसलों के लिए काफी अहम होती है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, यूपी जैसे राज्यों में सर्दियों में गेहूं, मटर, चना समेत कई और फसलों की खेती होती है. गर्मी के महीनों में इन सब फसलों की कटाई होती है. ऐसे में सर्दी की बारिश इन फसलों के लिए काफी अहम मानी जाती है. बारिश कम होने से इन फसलों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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