Waqf Act Supreme Court Order: SC का कानून पर रोक लगाने से इनकार, 11 प्वाइंट्स में जानें फैसले की प्रमुख बातें

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 15 Sep 2025 4:32 PM

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वक्फ बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Waqf Act Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी, लेकिन पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इस स्टोरी में आपको कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातों को बताएंगे.

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Waqf Act Supreme Court Order: वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ‘‘हमने प्रत्येक धारा को दी गई चुनौती पर प्रथम दृष्टया विचार किया और पाया कि पूरे कानून पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता.’’

कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं

*सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे पूरे कानून के प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं मिला.
*धारा 3(1)(आर) के उस प्रावधान पर रोक लगा दी गई है जिसके अनुसार कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ बना सकता है.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक राज्य सरकार यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना लेती कि इस तरह की प्रथा का सत्यापन कैसे किया जाएगा.
*सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्ति जांच के प्रावधानों पर आंशिक रूप से रोक लगा दी, जिसका अर्थ था कि किसी संपत्ति को केवल नामित अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर गैर-वक्फ नहीं माना जा सकता.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल ऐसी रिपोर्टों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड और बोर्ड रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाएगा.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्फ को उनकी संपत्तियों से बेदखल नहीं किया जाएगा और न ही आधिकारिक अभिलेखों की प्रविष्टियों में तब तक कोई बदलाव किया जाएगा जब तक कि धारा 83 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण द्वारा स्वामित्व विवाद का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, जो उच्च न्यायालय में अपील के अधीन है.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही के दौरान, उन संपत्तियों के संबंध में किसी तीसरे पक्ष के अधिकार का सृजन नहीं किया जा सकता.
*सुप्रीम कोर्ट ने राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों के प्रतिनिधित्व की सीमा तय कर दी. उसने कहा कि 22 सदस्यीय केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं. उसने कहा कि 11 सदस्यीय राज्य वक्फ बोर्डों में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं.
*सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के सीईओ के मुद्दे पर विचार किया और धारा 23 पर रोक नहीं लगाई, जो सीईओ को पदेन सचिव के रूप में नियुक्त करने से संबंधित है. हालांकि, उसने कहा कि जहां तक ​​संभव हो, सीईओ की नियुक्ति मुस्लिम समुदाय से की जानी चाहिए.
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये निर्देश अंतरिम प्रकृति के हैं और अंतिम चरण में संशोधित प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर बहस या निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगे.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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