SC का बड़ा फैसला: वक्फ कानून बरकरार, 5 साल की शर्त पर रोक

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 15 Sep 2025 11:06 AM

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सुप्रीम कोर्ट

Waqf Amendment Act : वक्फ विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सरकार को मामले में राहत मिली. कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की सभी धाराओं पर रोक से इनकार किया. कोर्ट ने कहा कि केवल कुछ प्रावधानों को ही अंतरिम सुरक्षा की आवश्यकता है.

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Waqf Amendment Act : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संशोधन कानून पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार किया और कहा कि कानून को संवैधानिक मानने की “पूर्व धारणा” है. हालांकि, कोर्ट ने कुछ धाराओं के लागू होने पर रोक लगाई है. इनमें वह प्रावधान भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि केवल वे लोग ही वक्फ बना सकते हैं जो पिछले 5 वर्षों से इस्लाम धर्म का पालन कर रहे हों. प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अंतरिम आदेश में कहा कि पूरे कानून पर रोक की जरूरत नहीं है, केवल कुछ हिस्सों पर ही रोक लगाई गई है.

शीर्ष अदालत ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे व्यक्ति ही वक्फ बना सकते हैं. इसने उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी जो सरकार द्वारा नामित किसी अधिकारी को यह तय करने का अधिकार देता है कि जो वक्फ संपत्ति है वह वास्तव में सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण है या नहीं.

वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा, “…अधिनियम को पूरी तरह से रोकने की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. केवल कुछ ही धाराओं को रोका गया है. यह एक अंतरिम आदेश है. अंतिम सुनवाई के बाद ही अंतिम फैसला आएगा. गैर-मुस्लिमों द्वारा वक्फ बनाने के संबंध में, कोर्ट ने कहा कि जब तक नए नियम नहीं बनाए जाते, तब तक मौजूदा स्थिति बनी रहेगी.”

वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक मुस्लिम होना चाहिए : कोर्ट

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमने माना है कि पूर्व धारणा हमेशा कानून की संवैधानिकता पर आधारित होती है और दुर्लभतम मामलों में ही ऐसा किया जा सकता है. हमने पाया है कि पूरे अधिनियम को चुनौती दी गई है, लेकिन मूल चुनौती धारा 3(आर), 3सी, 14… को थी.’’ न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि जहां तक संभव हो, वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक मुस्लिम होना चाहिए. शीर्ष अदालत ने साथ ही गैर-मुस्लिम को सीईओ नियुक्त करने की अनुमति देने वाले संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

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न्यायाधीश ने यह भी कहा कि राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषदों में गैर-मुस्लिमों की संख्या तीन से अधिक नहीं हो सकती. सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को तीन प्रमुख मुद्दों पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिनमें ‘‘अदालतों द्वारा वक्फ, उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ या विलेख द्वारा वक्फ’’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने का अधिकार भी शामिल है, जो वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया था.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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