वंदे मातरम् के सभी 6 स्टैंजा जन-गण-मन से पहले गाए जाएंगे; गृह मंत्रालय का फैसला

Published by : Govind Jee Updated At : 11 Feb 2026 12:07 PM

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जन-गण-मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम्; MHA का आदेश

MHA Guidelines: होम मिनिस्ट्री ने वंदे मातरम को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. सरकारी इवेंट्स में अब जन गण मन से पहले राष्ट्रगीत गाया जाएगा. इसके अलावा, अब वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाना जरूरी होगा, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी. प्रेसिडेंट और गवर्नर के इवेंट्स के लिए नए प्रोटोकॉल के बारे में जानें.

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MHA Guidelines: अब किसी भी सरकारी फंक्शन में नेशनल एंथम और नेशनल सॉन्ग के बजने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि अब इन दोनों को कब और कैसे गाया जाएगा.

क्या है नया नियम? वंदे मातरम् को मिलेगा ‘फर्स्ट चांस’

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एक ऑर्डर जारी किया है. इस ऑर्डर में साफ कहा गया है कि जब भी किसी कार्यक्रम में नेशनल सॉन्ग ‘वंदे मातरम्’ और नेशनल एंथम ‘जन-गण-मन’ एक साथ बजाए या गाए जाएंगे, तो वंदे मातरम् को पहले गाया जाएगा. यानी अब शुरुआत नेशनल सॉन्ग से होगी और उसके बाद नेशनल एंथम की बारी आएगी.

सभी 6 अंतरे गाने होंगे जरूरी

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए ‘वंदे मातरम्’ को लेकर प्रोटोकॉल अब काफी स्ट्रिक्ट हो गया है. मंत्रालय के निर्देश के अनुसार:

  • नेशनल सॉन्ग के सभी 6 स्टैंजा (अंतरे) गाना अनिवार्य होगा.
  • इस पूरे गाने की ड्यूरेशन (समय) 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है.
  • जब नेशनल सॉन्ग गाया जाएगा, तो वहां मौजूद सभी लोगों को सावधान की मुद्रा (Attention) में खड़ा होना होगा.

किन मौकों पर लागू होगा यह नियम?

गृह मंत्रालय के इस आदेश के अनुसार, यह प्रोटोकॉल खास तौर पर आधिकारिक यानी सरकारी कार्यक्रमों के लिए है. जैसे:

  • राष्ट्रपति (प्रेसिडेंट) का आगमन होने पर.
  • तिरंगा फहराने के समय.
  • राज्यपालों (गवर्नर्स) के भाषण के दौरान.
  • मंत्रियों की मौजूदगी वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी इसे गाना बेहतर माना जाएगा.
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों (परेड को छोड़कर) में इसका आधिकारिक वर्जन ही बजेगा.

सिनेमाहॉल में खड़े होने की टेंशन नहीं, पर स्कूल में होगा जरूरी

मंत्रालय ने एक बहुत ही काम की बात साफ की है. अगर किसी फिल्म, न्यूज रील या डॉक्यूमेंट्री के बीच में वंदे मातरम् बजता है, तो दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं है. ऐसा इसलिए ताकि फिल्म देखने में कोई डिस्टर्बेंस न हो और वहां अफरा-तफरी न मचे.

वहीं दूसरी ओर, स्कूलों के लिए निर्देश हैं कि दिन की शुरुआत नेशनल सॉन्ग के सामूहिक गायन के साथ होनी चाहिए. सरकार चाहती है कि स्टूडेंट्स में तिरंगे और देश के प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़े.

साउंड सिस्टम और लिरिक्स का भी रखा जाएगा ध्यान

मंत्रालय ने कहा है कि जहां भी नेशनल सॉन्ग गाया जाए, वहां साउंड सिस्टम एकदम टॉप क्लास होना चाहिए ताकि लोग एक सुर में गा सकें. अगर जरूरत पड़ी, तो लोगों के बीच नेशनल सॉन्ग के छपे हुए बोल (लिरिक्स) भी बांटे जा सकते हैं ताकि किसी से कोई गलती न हो.

150 साल पूरे होने का जश्न

केंद्र सरकार यह सारे बदलाव ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर कर रही है. हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि हर उस मौके की लिस्ट देना मुमकिन नहीं है जहां इसे गाया जा सकता है, लेकिन अगर कोई पूरी मर्यादा और सम्मान के साथ अपनी मातृभूमि को नमन करने के लिए इसे गाता है, तो उस पर कोई आपत्ति नहीं है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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