मथुरा में बनेगा भारत का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय, इन खूबियों की वजह से है खास
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 15 Feb 2026 12:27 PM
राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय के लिए मथुरा की यूनिवर्सिटी में जमीन चिह्नित की गई है. फोटो- कैनवा.
UP News: भारत का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय मथुरा में बनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश के ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने इसकी पहल की है. इसके तहत परंपरा और विज्ञान को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.
UP News: उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की एक नई पहल के तहत मथुरा में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय बनाया जाएगा. यह संग्रहालय पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर में स्थापित किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर के भीतर जमीन तय कर ली गई है.
आगरा मंडल के आयुक्त नगेंद्र प्रताप ने बताया कि यह संग्रहालय आम लोगों को गाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा. इसके साथ ही वैज्ञानिक नजरिए से गाय और उससे मिलने वाले उत्पादों की उपयोगिता को भी आसान तरीके से समझाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि यह परियोजना परंपरा और विज्ञान को जोड़ने का प्रयास है. इसके जरिए गो-संरक्षण, गो-पालन और गो-आधारित जीवनशैली को लेकर लोगों में सही समझ विकसित की जाएगी, ताकि भविष्य की पीढ़ी भी इससे जुड़ सके.
शनिवार को प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा और विश्वविद्यालय के डॉ. अमित शुक्ला मौजूद रहे.
क्या खास होगा इस गो-संस्कृति म्यूजियम में?
इस संग्रहालय में करीब 100 तरह के गोवंश के मॉडल दिखाए जाएंगे. इनमें देश की सभी प्रमुख गायों की नस्लें और कुछ दुर्लभ व लुप्त होती प्रजातियां भी शामिल होंगी. इसका उद्देश्य यह है कि लोग भारत की समृद्ध गो-परंपरा को एक ही जगह पर देख और समझ सकें.
संग्रहालय में गाय के दूध और उससे बनने वाले उत्पादों, जैसे दूध, दही, पनीर और घी की भी खास प्रदर्शनी होगी. यहां आधुनिक तकनीक के जरिए इनके पोषण, स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक लाभों को सरल भाषा में बताया जाएगा. इसके अलावा परिसर में एक दुग्ध उत्पाद बूथ भी बनाया जाएगा, जहां शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद उपलब्ध होंगे.
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना में सनातन परंपरा में गाय की आध्यात्मिक भूमिका को खास तौर पर दिखाया जाएगा. मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जा रहा यह संग्रहालय ब्रज क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करेगा और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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