तीसरी बार राज्यपाल से मिलने पहुंचे विजय, बहुमत का समर्थन पत्र सौंपेंगे

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 08 May 2026 6:12 PM

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राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के साथ टीवीके नेता विजय

TVK Vijay : तमिलनाडु में सरकार गठन का रास्ता संभवत: साफ होता जा रहा है. कांग्रेस के बाद अब कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके ने टीवीके को अपना समर्थन देने की बात कह दी है. टीवीके कार्यालय में इस बात पर खुशियां भी मनाई जा रही हैं और विजय सरकार बनाने का दावा पेश भी करने वाले हैं.

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TVK Vijay : तमिलनाडु में कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके शाम 5 बजे मीडिया के सामने यह घोषणा करने वाली हैं कि वे विजय के साथ हैं. जानकारी के अनुसार टीवीके नेता विजय उससे पहले राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे. टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं था, जिसकी वजह से राज्यपाल ने अबतक विजय को सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया था, लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है.

कम्युनिस्ट पार्टी ने दिया समर्थन का वादा

कम्युनिस्ट पार्टी जिनके पास कुल 4 सीटें हैं, वे शुक्रवार शाम बैठक करने वाले हैं. बैठक के बाद वे मीडिया से बात करने वाले हैं हालांकि उन्हें मनाने के लिए टीवीके के नेता सीटीआर निर्मल कुमार कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालय पहुंच चुके हैं और टीवीके नेता कामराज ने कहा है कि अभी टीवीके को पूर्ण बहुमत मिलना वाला है. विजय शाम 4.30 बजे गवर्नर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. हमें यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि CPI, CPI(M) और VCK ने सरकार बनाने के लिए विजय को समर्थन देने की बात मान ली है.

राज्यपाल भवन के बाहर प्रदर्शन

टीवीके नेता विजय अबतक दो बार राज्यपाल से मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिला है. इस बीच उनके समर्थक राज्यपाल भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. वे यह मांग कर रहे हैं कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का निमंत्रण दें. विजय से गवर्नर ने 118 सदस्यों का समर्थन पत्र मांगा है. अब जबकि विजय तीसरी बार राज्यपाल से मिलने पहुंचे हैं, उम्मीद की जा रही है कि वे बहुमत का समर्थन पत्र देने पहुंचे हैं और जल्दी ही तमिलनाडु में विजय सरकार बना लेंगे.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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