Tandav Web Series Controversy : सुप्रीम कोर्ट ने दिया तांडव वेब सीरीज के निर्माताओं को झटका, नहीं दी राहत
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Jan 2021 9:52 PM
तांडव वेब सीरीज विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मेकर्स को बड़ा झटका दिया है. एक्टर, निर्माताओं और अमेजन प्राइम (इंडिया) टीम ने विवाद के कारण दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
तांडव वेब सीरीज विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मेकर्स को बड़ा झटका दिया है. एक्टर, निर्माताओं और अमेजन प्राइम (इंडिया) टीम ने विवाद के कारण दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
वेब सीरीज तांडव पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. अशोक भूषण, आर सौरभ रेड्डी और एमआर शाह की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर सहमति जतायी कि कई राज्यों में उन पर हुई एफआईआर को एक करने का आदेश दिया है.
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अभिनेता मोहम्मद अयुब अमेजन प्राइव के हेड और तांडव वेबसीरीज के निर्माता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. तांडव वेब सीरीज पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है.
सुनवाई के दौरान तांडव वेब सीरीज की तरफ से वरिष्ठ वकील फाली नरीमन कोर्ट में पेश हुए उन्होंने कहा तांडव वेब सीरीज के कुछ दृश्यों को लेकर आतत्ति थी. उस भाग को हटा दिया गया है और माफी भी मांग ली गयी है. इस मामले में अब कुछ खास नहीं बचा है. इस पूरे मामले पर कोर्ट ने कहा, आपके अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं है.
आप ऐसे चरित्र की भूमिका नहीं निभा सकते जो किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए. न्यायालय ने इन याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों को नोटिए जारी किये. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ‘‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है” और यह कुछ पाबंदियों के अधीन है.
पीठ ने इन याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और शिकायतों की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किये . ‘‘तांडव” में बॉलीवुड कलाकारों सैफ अली खान, डिपंल कपाड़िया और मोहम्मद जीशान अयूब आदि ने काम किया है. पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई में कहा, ‘‘ हम सीआरपीसी की धारा 482 (आपराधिक मामले को खत्म करने के लिए अदालतों की शक्ति) के तहत अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते हैं. हम अंतरिम संरक्षण देने के लिए इच्छुक नहीं हैं.
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