10 रुपये का सवाल! जब एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की वेबसाइट ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

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सांकेतिक फोटो, PHOTO AI

Tamil Nadu: चेन्नई के रहने वाले 30 साल सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपक ने एक ऐसी शुरुआत की, जिसने तमिलनाडु की सरकारी व्यवस्था में फैले रोजमर्रा के भ्रष्टाचार को जनता के सामने लाकर खड़ा कर दिया.

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Tamil Nadu: दीपक ने इसकी शुरुआत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण वाले दिन की थी. जब बाकी लोग जश्न मना रहे थे, तब दीपक ने एक साधारण सी वेबसाइट लॉन्च की. उनका मकसद उस आम शिकायत की हकीकत जानना था. TASMAC (सरकारी शराब दुकानों) पर हर बोतल पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त 10 रुपये.

दीपक के प्रयास को मिली बड़ी सफलता, 300 शिकायतें आईं

सरकारी शराब दुकानों पर हर बोतल पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त 10 रुपये का मुद्दा बड़ा हो चुका था. इसकी चर्चा हर जगह हो रही थी. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार दीपक ने बताया- इस मुद्दे को लेकर आम लोगों में भारी गुस्सा था. लेकिन मैं जानना चाहता था कि यह गुस्सा वास्तव में कितना व्यापक था. आगे जो हुआ उसने दीपक को चौंका दिया. कुछ ही दिनों में, लगभग 300 शिकायतें आईं. कुछ शिकायतों में दुकानों के नाम बताए गए थे, जबकि अन्य में तस्वीरें संलग्न थीं. तीसरे दिन एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने दीपक को फोन किया. उन्होंने इस विचार की सराहना की. TASMAC के अधिकारियों को भी इसके बारे में पता चल गया.

दीपक ने एक और वेबसाइट शुरू की मक्कल साची’ (Makkal Saatchi)

शुरुआती वेबसाइट को मिली भारी प्रतिक्रिया से हैरान होकर दीपक ने इसका दायरा बढ़ाया. केवल शराब दुकानों के भ्रष्टाचार तक सीमित न रहकर उन्होंने 27 मई को मक्कल साची (People’s Witness) नाम से एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया. अब तक इस प्लेटफॉर्म पर करीब 400 शिकायतें आ चुकी हैं. इनमें से अधिकांश गुमनाम हैं. लगभग 10 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने स्वेच्छा से संपर्क विवरण दिए हैं. दीपक का कहना है कि कई शिकायतें कथित रकम के कारण नहीं, बल्कि उनमें वर्णित बेबसी के कारण चौंकाने वाली हैं। उन्होंने कहा, “कई शिकायतें अपने वर्णन में एकदम स्पष्ट हैं। कुछ तो दिल दहला देने वाली हैं। आप उन्हें भूल नहीं सकते। कुछ को पढ़ना भी कष्टदायक है। उन्हें पढ़कर मन भारी हो जाता है।”

जब डिजिटल आवाज का हुआ तगड़ा असर

दीपक ने भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए जिस मुहिम की शुरुआत की उसका तगड़ा असर देखने को मिला. कई विभाग में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए.

चेन्नई पुलिस का मामला: एक पुलिस स्टेशन द्वारा निजी विवाद सुलझाने के लिए 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई. दीपक ने जब इस शिकायत को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बड़े अधिकारियों को टैग किया, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई.

नमक्कल का सर्वेयर मामला: जमीन नापने वाले सर्वेक्षकों द्वारा नए उपकरणों की लागत वसूलने के नाम पर आवेदकों से 10,000 की मांग की जा रही थी. इस खुलासे के बाद अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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