महुआ मोइत्रा की लोकसभा से निष्कासन संबंधी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने पर करेंगे विचार, बोले CJI

**EDS: VIDEO GRAB VIA SUPREME COURT OF INDIA YOUTUBE** New Delhi: Chief Justice of India DY Chandrachud during pronouncement of verdict on a batch of petitions challenging the abrogation of Article 370 of the Constitution, in New Delhi, Monday, Dec. 11, 2023. (PTI Photo)(PTI12_11_2023_000034A)
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हो सकता है कि मामला पंजीकृत नहीं हुआ हो. कोई ईमेल भेजा गया है, तो मैं तुरंत इसे देखूंगा. कृपया इसे भेजें. इससे पहले, सिंघवी ने न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मोइत्रा की याचिका का उल्लेख किया क्योंकि प्रधान न्यायाधीश संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे हैं.
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की नेता महुआ मोइत्रा के वकील को आश्वासन दिया कि वह लोकसभा से उनके (मोइत्रा के) निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे. वहीं, झारखंड से बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया है. दुबे की शिकायत के बाद ही मोइत्रा का लोकसभा से निष्कासन हुआ था. लोकसभा में आचार समिति की रिपोर्ट को मंजूर किए जाने के बाद सोमवार को टीएमसी नेता को निष्कासित कर दिया गया. इसके विरोध में मोइत्रा ने शीर्ष अदालत का रुख किया है. इस रिपोर्ट में मोइत्रा को ‘पैसे लेकर सवाल पूछने’ के मामले में ‘अनैतिक एवं अशोभनीय आचरण’ का जिम्मेदार ठहराया गया था.
झारखंड से बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने शीर्ष अदालत में दायर अर्जी में कहा है कि चूंकि तत्काल याचिका की पूरी वजह उनके (दुबे) द्वारा 15 अक्टूबर, 2023 को की गई शिकायत से उत्पन्न हुई है, इसलिए, यह उचित और न्याय के हित में है कि उनको एक आवश्यक पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने बुधवार को महुआ मोइत्रा की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी की दलीलों पर संज्ञान लिया. प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि दोपहर के भोजन के समय वह, याचिका सूचीबद्ध करने संबंधी पहलू पर गौर करेंगे. याचिका को गुरुवार या शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हुए सिंघवी ने दलील दी कि, यह वह सदस्य हैं, जिन्हें लोकसभा से निष्कासित किया गया है.
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प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हो सकता है कि मामला पंजीकृत नहीं हुआ हो… अगर कोई ईमेल भेजा गया है, तो मैं तुरंत इसे देखूंगा. कृपया इसे भेजें. इससे पहले, सिंघवी ने न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मोइत्रा की याचिका का उल्लेख किया क्योंकि प्रधान न्यायाधीश संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे हैं. न्यायमूर्ति कौल ने तब सिंघवी से कहा, इस मसले पर प्रधान न्यायाधीश फैसला लेंगे. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आठ दिसंबर को हंगामेदार चर्चा के बाद लोकसभा में मोइत्रा के निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. चर्चा में मोइत्रा को खुद का पक्ष रखने का मौका नहीं मिला था.
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अपने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने इस फैसले की तुलना ‘‘कंगारू अदालत’’ द्वारा सजा दिए जाने से करते हुए आरोप लगाया कि सरकार लोकसभा की आचार समिति को, विपक्ष को झुकने के लिए मजबूर करने का हथियार बना रही है. अक्टूबर में, दुबे ने उच्चतम न्यायालय के वकील जय अनंत देहाद्रई की एक शिकायत के आधार पर आरोप लगाया कि मोइत्रा ने उद्योगपति गौतम अडाणी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाने के लिए कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से नकदी और उपहार के बदले में लोकसभा में प्रश्न पूछे थे. समिति को 19 अक्टूबर को दिए एक हलफनामे में हीरानंदानी ने दावा किया कि मोइत्रा ने लोकसभा सदस्यों की वेबसाइट से जुड़ी अपनी लॉग-इन आईडी और पासवर्ड उनके साथ साझा किया था. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही मामले में प्रारंभिक प्राथमिकी दर्ज कर चुका है.
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