ePaper

Sports: खेल उद्योग को गति देने के लिए सरकार गठित करेगी टास्क फोर्स

Updated at : 30 Aug 2025 6:37 PM (IST)
विज्ञापन
Dr Mansukh Mandaviya

केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया

मौजूदा समय में खेल क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी सिर्फ एक फीसदी है. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक इसे 25 फीसदी करने का है. देश में युवा आबादी सबसे अधिक है और भारत दुनिया के लिए सबसे बड़ा बाजार है. ऐसे में खेल उद्योग को बढ़ाने के लिए तय किए रोडमैप पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है.

विज्ञापन

Sports: रक्षा, मेडिकल, तकनीक से लेकर खेल के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार की कोशिश खेल उत्पाद के मामले में भी देश को आत्मनिर्भर बनाने की है. देश में पहली बार खेल उपकरण मैन्युफैक्चरिंग को केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय के आवंटन नियम में शामिल किया गया है. सरकार के इस फैसले से खेल उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि अन्य उद्योगों की तरह खेल से जुड़े निर्माण करने वाली कंपनियों को भी उद्योग का दर्जा हासिल होगा. शनिवार को स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मंडाविया ने यह बात कही. देश में पहली बार इस तरह का आयोजन किया गया, जिसमें नीति आयोग, वाणिज्य मंत्रालय, फिक्की, सीआईआई, छोटे एवं लघु उद्योग के अलावा देश के प्रमुख खेल उत्पादन कंपनियों के प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. 


इस बैठक में देश में खेल उपकरण निर्माण के लिए रोडमैप तैयार करने पर मंथन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा कि पहली बार सरकार देश के आर्थिक विकास में खेल उद्योग को महत्व देने का निर्णय लिया है. देश में खेल का इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में खेल उपकरण के निर्माण में भारत दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा. सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का काम कर रही है. 


खेल में भी स्वदेशी को बढ़ावा देना समय की मांग 


मनसुख मंडाविया ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत के एजेंडे पर काम कर रही है. ऐसे में देश के लोगों को भी देश प्रथम की भावना से काम करते हुए स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना चाहिए. मौजूदा समय में खेल क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी सिर्फ एक फीसदी है और हमारा लक्ष्य वर्ष 2036 तक इसके 25 फीसदी करने का है. मांग होने पर ही आर्थिक विकास होता है और यह उत्पादन बढ़ने से बढ़ता है. देश में युवा आबादी सबसे अधिक है और भारत दुनिया के लिए सबसे बड़ा बाजार है. ऐसे में खेल उद्योग को बढ़ाने के लिए तय किए रोडमैप पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है. आने वाले समय में एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसमें मंत्रालय के अलावा अन्य हितधारकों को भी शामिल कर नीति बनाने का काम होगा. 


मौजूदा समय में भारत खेल क्षेत्र का कारोबार 42877 करोड़ रुपये है और वर्ष 2027 तक इसके 57800 करोड़ रुपये और वर्ष 2034 तक 87300 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. इस क्षेत्र में पांच लाख लोग काम कर रहे हैं. खासकर मेरठ, जालंधर, लुधियाना, दिल्ली-एनसीआर में खेल से जुड़े कई छोटे एवं लघु उद्योग हैं. एशिया में भारत खेल उपकरण का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित 90 देशों में भारतीय खेल उपकरण की आपूर्ति होती है. सरकार की कोशिश भारत को खेल उद्योग का वैश्विक हब बनाना है. ताकि देश में खेल से जुड़े इकोसिस्टम का निर्माण हो सके.

ReplyForwardShare in chatNew
विज्ञापन
Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola