स्पाइसजेट की फ्लाइट में मची चीख-पुकार, सांस लेने में दिक्कत के बाद यात्रियों का हंगामा, रनवे से लौटा विमान
दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट का विमान
स्पाइसजेट की फ्लाइट SG 105 में मंगलवार रात तकनीकी समस्या होने के बावजूद उसे उड़ान के लिए तैयार करने पर कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ी और उनके हंगामे के बाद रनवे से फ्लाइट को वापस किया गया. बाद में दूसरी फ्लाइट का इंतजाम करके यात्रियों को दिल्ली से पुणे भेजा गया.
11 अगस्त मंगलवार को स्पाइसजेट की फ्लाइट SG 105, जो दिल्ली से पुणे के लिए उड़ान भरने वाली थी, आखिरी समय में तकनीकी समस्या की वजह से उड़ान नहीं भर सकी. यह जानकारी स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने दी है. उन्होंने बताया कि समस्या सामने आने के बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया और यात्रियों को पुणे ले जाया गया. इस वजह से यात्रियों को काफी परेशानी हुई, जिसके लिए हमें अफसोस है.
यात्रियों ने विमान में यात्रा करने से मना कर दिया
विमान के केबिन में एसी काम नहीं करने से 100 से अधिक यात्री गर्मी और उमस से परेशान हो गये. यात्रियों ने यात्रा करने से इनकार कर दिया.यात्रियों के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि कुछ तकनीकी समस्या होगी और कुछ देर में एसी चालू हो जाएगा, लेकिन रनवे पर विमान के चलने के करीब 40-45 मिनट बाद भी एसी चालू नहीं हुआ. इस दौरान कई यात्रियों की तबीयत खराब होने लगी और कुछ को घुटन महसूस हुई. यात्रियों ने केबिन क्रू से एसी चालू करने का अनुरोध किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद यात्रियों ने अपनी सीटों से उठकर उड़ान रोकने और विमान के दरवाजे खोलने की मांग की. यात्रियों के हंगामा करने के बाद विमान को वापस लाया गया और यात्रियों को उतरने की इजाजत दी गई.
एसी बंद होने से यात्रियों को सांस लेने में हुई दिक्कत
स्पाइसजेट की फ्लाइट SG 105 के एक यात्री लेशपाल ने एएनआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि हमारी स्पाइसजेट की फ्लाइट रात 9.55 की थी, लेकिन इसमें देरी हो गई. बोर्डिंग 10.30 बजे शुरू हुई लगभग आधा घंटा बीत गया; अंदर कोई वेंटिलेशन नहीं था. हमें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और एसी भी नहीं चल रहा था. चूंकि मैं नियमित यात्री नहीं हूं, इसलिए मैंने मान लिया कि यह सिर्फ एक तकनीकी समस्या है. बाद में, स्थिति इतनी खराब हो गई कि हमारे कपड़े पसीने से पूरी तरह भीग गए थे. हर यात्री की हालत एक जैसी थी. बच्चे रो रहे थे, गर्भवती महिलाओं को दिक्कत हो रही थी. यात्रियों ने हंगामा किया, लेकिन कर्मचारी सहयोग नहीं कर रहे थे और तमाशा बनाने के लिए हम पर चिल्ला रहे थे. आखिरकार, उनकी तकनीकी टीम आई और जांच के बाद यह कहा गया कि प्लेन उड़ नहीं सकता. बाद में वे हमें वापस अंदर ले गए, सुबह 5:00 बजे के लिए दूसरी फ्लाइट का इंतजाम किया और हम आख़िरकार उस समय निकल गए.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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