अमित शाह को राहुल गांधी का जवाब-हमें उन्हें सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं, वे इस्तीफा दें
संसद भवन परिसर में राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को संसद के परिसर में कहा कि विपक्ष को पार्लियामेंट में होम मिनिस्टर का लेक्चर सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं. हम यह जानना चाहते हैं कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर लाठी चार्ज का आदेश किसने दिया था? किसके आदेश से स्टूडेंट्स पर पैलेटगन चलाया गया.
राहुल गांधी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी इन सवालों का जवाब चाहती है. अगर यह सबकुछ अमित शाह के आदेश से हुआ है, तो हम उनसे इस्तीफे की मांग करते हैं. उन्हें अविलंब अपना इस्तीफा देना चाहिए. अगर यह सबकुछ उनके आदेश से नहीं हुआ है, तब भी उन्हें तुरंत अपना इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वे नाकाबिल हैं.
अमित शाह के अंदर संसद आने की हिम्मत नहीं है
राहुल गांधी ने कहा कि संसद से अमित शाह पूरे 20 दिन से गायब हैं. वे रोज यहां आते हैं, लेकिन सदन में आने की उनकी हिम्मत नहीं है. हमें उन्हें सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते हैं. गांधी ने कहा कि शाह की इमेज का गुब्बारा फुला दिया गया था और उसमें गैस भरने की आखिरी कोशिश की गई थी लेकिन गुब्बारा फूट गया.
अमित शाह ने सदन में जवाब देने की बात कही
गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद भवन परिसर में कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं है. वे सिर्फ हंगामा चाहते हैं. अमित शाह ने कहा कि हम आज से ही चर्चा के लिए तैयार हैं और सभी प्रश्नों का जवाब मैं दूंगा, ताकि देश के सामने सच्चाई आ सके.
ये भी पढ़ें : 'हर सवाल का जवाब देने को तैयार', अमित शाह ने विपक्ष को दी चुनौती- आप तय करें चर्चा करनी है या हंगामा
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










