मां, तुम्हारी तलाश में फिर आऊंगी तुम्हारे देश, स्नेहा की कहानी सुनकर आप भी हो जाएंगे भावुक
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 06 Jan 2025 7:44 AM
स्नेहा (बाएं) जेमा (दाएं)
Spain Girl Emotional Story : स्पेन से भारत पहुंची 21 साल की स्नेहा अपनी बायोलॉजिकल मां की तलाश कर रहीं हैं. स्नेहा के साथ इस यात्रा में उनकी स्पेनिश माता-पिता भी साथ दे रहे हैं.
Spain Girl Emotional Story : स्पेन से भारत पहुंची 21 वर्षीय स्नेहा अपनी बायोलॉजिकल मां की तलाश में यहां आई हैं, जिनसे वह 20 साल पहले अलग हो गई थीं. स्नेहा और उनके भाई को एक अनाथालय में छोड़ दिया गया था. अब स्नेहा अपनी जड़ों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि, समय उनके लिए बहुत कम है, क्योंकि उन्हें 6 जनवरी को स्पेन लौटना है. बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में रिसर्चर के रूप में काम करने वाली स्नेहा के लिए यह खोज बहुत मायने रखता है, लेकिन उन्हें अपनी मां के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.
स्नेहा के साथ इस यात्रा में उनकी स्पेनिश माता-पिता जेमा विडेल और जुआन जोस भी साथ दे रहे हैं. बायोलॉजिकल मां की तलाश में वे साथ दे रहे हैं. खासकर जेमा, स्नेहा के साथ उनके गृह राज्य ओडिशा आई हैं, ताकि वह अपनी मां को खोजने में मदद कर सकें. भारत आना स्नेहा के लिए भावनात्मक यात्रा भी है, जिससे वह अपनी असली पहचान और अतीत को समझने की गहरी कोशिश करने में लगीं हैं.
स्नेहा और उनके भाई सोमू को 2010 में भुवनेश्वर के एक अनाथालय से गोद लिया था. उन्हें 2005 में उनकी बायोलॉजिकल मां बनलता दास द्वारा छोड़ दिया गया था. स्नेहा और सोमू दोनों को उस समय अनाथालय में आश्रय दिया गया था. इस वक्त स्नेहा केवल एक साल की थी और उनका भाई कुछ महीने का था. स्नेहा की यात्रा का उद्देश्य अपने बायोलॉजिकल माता-पिता, विशेष रूप से अपनी मां को ढूंढना है.
स्नेहा ने कहा, ‘‘स्पेन से भुवनेश्वर तक की मेरी यात्रा का उद्देश्य मेरे बायोलॉजिकल माता-पिता, खासकर मेरी मां को ढूंढना है. मैं उन्हें ढूंढना चाहती हूं और उनसे मिलना चाहती हूं. मैं इस काम के लिए पूरी तरह तैयार हूं, भले ही यह कठिन हो.’’ भारत की यात्रा स्नेहा के लिए केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी पहचान के साथ-साथ अतीत को फिर से जोड़ने की एक भावनात्मक यात्रा भी है.
स्नेहा ने कहा कि उनके स्पेनिश माता-पिता ने परवरिश में कोई कमी नहीं रखी. उन्होंने कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे गोद लिए गए हैं. जेमा ने कहा, ‘‘हमें स्पेन वापस लौटना होगा, क्योंकि स्नेहा एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल हो गई है. इसे रोका नहीं जाना चाहिए. हम मार्च में भुवनेश्वर वापस आएंगे.’’
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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