Panchayat: महिला सुरक्षा और सम्मान का मुख्य केंद्र बनेंगे पंचायत

Published by : Vinay Tiwari Updated At : 28 May 2026 7:44 PM

विज्ञापन

कार्यशाला में घरेलू हिंसा, बाल विवाह, लिंग आधारित भेदभाव, साइबर सुरक्षा और पीड़ित मुआवजा प्रणाली जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गयी.

विज्ञापन

Panchayat: ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और कानूनी अधिकारों को मजबूत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. हिंसा से मुक्ति और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘निर्भय रहो पहल’ के तहत आयोजित किया गया था. 

कार्यक्रम का मकसद पंचायत प्रतिनिधियों को कानूनी तौर पर जागरूक और लैंगिक रूप से संवेदनशील बनाना है. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि पंचायतों में महिला सुरक्षा और बेहतर शासन के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम हो रहा है. इसके तहत निर्भय नेत्री पहल के तहत  निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता और कानूनी जागरूकता को मजबूत करने, निर्भय चेतना के तहत पुरुष जनप्रतिनिधियों को लैंगिक समानता और महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक करने और निर्भय दृष्टि के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के संवेदनशील और प्रमुख स्थानों पर तकनीक आधारित सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना है. 

देश भर से आए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने लिया भाग 

इन योजनाओं के जरिये देश भर की लगभग 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और 17.5 लाख पुरुष प्रतिनिधियों तक प्रशिक्षण और जागरूकता पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि जागरूक और संवेदनशील पंचायत नेतृत्व ही ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है. तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश भर से आए लगभग 50 विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यशाला में घरेलू हिंसा, बाल विवाह, लिंग आधारित भेदभाव, साइबर सुरक्षा और पीड़ित मुआवजा प्रणाली जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई. 

प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने के लिए विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ ही मूट कोर्ट, समूह चर्चा और केस स्टडीज का सहारा लिया गया. बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉक्टर साईंराम भट ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि समाज में बदलाव के सबसे प्रभावी माध्यम हैं और उन्हें पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना होगा. इस दौरान एक कैस्केडिंग मॉडल यानी क्रमिक विस्तार मॉडल के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा ताकि अंतिम पायदान पर बैठी महिला तक इसका लाभ पहुंच सके. यह कदम देश की पंचायतों को अधिक सुरक्षित और महिला अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. यह कार्यक्रम महिला और बाल विकास मंत्रालय और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु के सहयोग से चलाया जा रहा है. 

विज्ञापन
Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola