Saw Scaled Viper: केवल आवाज से रूह कंपा देता है यह सांप, काट ले तो पानी भी नहीं मांगता आदमी
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 01 Aug 2025 1:19 PM
Saw Scaled Viper
Saw Scaled Viper : सॉ स्केल्ड वाइपर एक अत्यंत विषैला सांप है जो भारत में भी पाया जाता है. वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के आधार पर झारखंड में सॉ स्केल्ड वाइपर का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है. सॉ स्केल्ड वाइपर का शरीर छोटा के साथ–साथ मोटा होता है. जानें इस सांप के बारे में खास बातें.
Saw Scaled Viper : सॉ स्केल्ड वाइपर, जिसे वैज्ञानिक रूप से Echis carinatus के नाम से जाना जाता है, एक छोटा लेकिन अत्यंत जहरीला सांप है. यह सांप भारत, मध्य पूर्व, और अफ्रीका के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है. यह अपने शरीर पर मौजूद दांतेदार पैमानों को रगड़कर एक खरखराहट की आवाज पैदा करता है, जिसे स्ट्रिडुलेशन कहा जाता है. आवाज से यह खतरे की चेतावनी देता है. यह जानकारी भगवान बिरसा जैविक उद्यान (रांची) के वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक विवेकानंद कुमार ने दी.
विवेकानंद ने बताया कि सॉ स्केल्ड वाइपर भारत के “बिग फोर” जहरीले सांपों में से एक है, जिसमें इंडियन कोबरा (Naja naja), कॉमन क्रैट (Bungarus caeruleus), रसेल्स वाइपर (Daboia russelii), और सॉ स्केल्ड वाइपर शामिल हैं. ये सांप भारत में सांप काटने की घटनाओं और मौतों के लिए जिम्मेदार हैं. इस लेख में हम आपको सॉ स्केल्ड वाइपर की शारीरिक विशेषताएं, विश्व और भारत में इसकी प्रजातियां, भारत में इसका वितरण, झारखंड में इसकी उपस्थिति, इसका विष, सांप काटने पर उपाय, और इससे बचने की सावधानियां शामिल हैं.
सॉ स्केल्ड वाइपर की शारीरिक विशेषताओं के बारे में जानें (Physical characteristics of the Saw-scaled Viper)
वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक ने बताया कि सॉ स्केल्ड वाइपर का शरीर छोटा और मोटा होता है, जिसकी लंबाई सामान्यतः 15 से 31 इंच (38 से 80 सेंटीमीटर) तक होती है, लेकिन औसतन यह लगभग 24 इंच (60 सेंटीमीटर) होती है. इसका सिर त्रिकोणाकार और गर्दन से स्पष्ट रूप से अलग होता है, जिसमें ऊर्ध्वाधर पुतलियां होती हैं. सिर पर अक्सर एक तीर या ‘+’ के आकार का सफेद निशान होता है. इसके शरीर पर पैमाने खुरदरे और दांतेदार होते हैं, जो 45 डिग्री के कोण पर होते हैं और इसे इसका नाम देते हैं. इसका रंग हल्का भूरा, ग्रे, लाल, या पीला-भूरा हो सकता है, जिसमें गहरे भूरे रंग के ज़िगज़ैग पैटर्न और पेट पर सफेद से गुलाबी रंग होता है. जब यह सांप खतरा महसूस करता है, तो यह अपने शरीर को ‘C’ आकार की समानांतर कुंडलियों में लपेटता है और पैमानों को रगड़कर एक खरखराहट की आवाज पैदा करता है. यह सांप रात में सक्रिय होता है और शुष्क, पत्थरीले, या झाड़ीदार क्षेत्रों में रहता है. यह चूहों, छिपकलियों, मेंढकों, और बिच्छुओं जैसे छोटे जीवों का शिकार करता है.
सॉ स्केल्ड वाइपर किस जीनस के अंतर्गत आता है ? (Saw-scaled viper belongs to these genus)
उन्होंने बताया कि सॉ स्केल्ड वाइपर Echis जीनस के अंतर्गत आता है, जिसमें विश्वभर में संभवतः 8 प्रजातियां शामिल हैं. इनमें से Echis carinatus भारतीय उपमहाद्वीप, पाकिस्तान, श्रीलंका, और बांग्लादेश में सबसे आम है. अन्य प्रजातियां, जैसे Echis pyramidum, Echis coloratus, और Echis leucogaster, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में पाई जाती हैं. भारत में Echis carinatus की दो उप-प्रजातियां पाई जाती हैं: 1. Echis carinatus carinatus (दक्षिणी भारत में) और 2. Echis carinatus sochureki (उत्तर-पश्चिमी भारत में). इन उप-प्रजातियों के विष में भौगोलिक भिन्नता हो सकती है, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में एंटीवेनम की प्रभावशीलता कम हो सकती है.
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सॉ स्केल्ड वाइपर भारत के किन क्षेत्रों में पाया जाता है? (Saw-scaled viper is found in these state)
वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक ने बताया कि सॉ स्केल्ड वाइपर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है, विशेष रूप से प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिमी भारत में. यह सांप शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों, जैसे रेगिस्तान, पत्थरीली पहाड़ियां, झाड़ीदार इलाके, और कृषि क्षेत्रों में रहता है. यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, और पंजाब जैसे राज्यों में आम है. हालांकि, यह पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत, गंगा मैदानों, और हिमालय की तलहटी में नहीं पाया जाता है. यह सांप ढीले पत्थरों, पत्तियों, और पेड़ की छाल के नीचे छिपना पसंद करता है और बारिश के बाद या नम रातों में अधिक सक्रिय होता है. इसकी छोटी आकार और छिपने की प्रवृत्ति के कारण यह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है.
झारखंड में क्या सॉ स्केल्ड वाइपर पाए जाते हैं?
वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के आधार पर, झारखंड में सॉ स्केल्ड वाइपर का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है. यह बात वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक ने कही. उन्होंने बताया कि यह सांप पूर्वी भारत, गंगा मैदानों, और हिमालय की तलहटी में नहीं पाया जाता है. झारखंड में अन्य जहरीले सांप, जैसे कॉमन क्रैट (Bungarus caeruleus), इंडियन कोबरा (Naja naja), रसेल्स वाइपर (Daboia russelii), और बैंबू वाइपर, अधिक आम हैं. उदाहरण के लिए, 2010 में हजारीबाग, झारखंड में किए गए एक सर्वेक्षण में कॉमन क्रैट, बैंडेड क्रैट, स्पेक्टेकल्ड कोबरा, रसेल्स वाइपर, और ग्रीन पिट वाइपर जैसे सांपों का उल्लेख है, लेकिन सॉ स्केल्ड वाइपर का नहीं. हाल के लेखों में भी झारखंड में सांप काटने की घटनाओं में अन्य प्रजातियों का उल्लेख है, जिससे यह संभावना प्रबल होती है कि सॉ स्केल्ड वाइपर झारखंड में नहीं पाया जाता है.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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