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मां को लिखी चिट्ठी में संजय राउत ने लगाया आरोप, शिवसेना को धोखा नहीं दिया तो भेज दिया गया जेल

Updated at : 12 Oct 2022 8:33 PM (IST)
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मां को लिखी चिट्ठी में संजय राउत ने लगाया आरोप, शिवसेना को धोखा नहीं दिया तो भेज दिया गया जेल

शिवसेना के नेता संजय राउत को ईडी ने मुंबई स्थित पात्रा ‘चॉल' के पुनर्विकास में हुई कथित अनियमितता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक अगस्त को गिरफ्तार किया था. वह इस समय न्यायिक हिरासत में हैं.

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मुंबई : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद शिवसेना के नेता संजय राउत ने अपनी मां को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया है कि उन पर पार्टी से विश्वासघात करने का दबाव था. जब मैंने बिना झुके वैसा नहीं किया, तो जेल में डाल दिया गया. अपनी गिरफ्तारी के करीब एक हफ्ते बाद उन्होंने बीते आठ अगस्त को अपनी मां को चिट्ठी लिखी थी. इसमें उन्होंने कहा कि शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और शिवसैनिक भी आपके बच्चे की तरह हैं. जब तक मैं जेल में रहूंगा, वे आपकी देखरेख करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया, ‘सभी जानते हैं कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए और धमकाकर बयान दिलाए गए.’

ईडी की न्यायिक हिरासत में हैं संजय राउत

बताते चलें कि शिवसेना के नेता संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई स्थित पात्रा ‘चॉल’ के पुनर्विकास में हुई कथित अनियमितता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक अगस्त को गिरफ्तार किया था. वह इस समय न्यायिक हिरासत में हैं. ईडी का आरोप है कि पात्रा चॉल पुनर्विकास या गोरेगांव में किराए पर घर दिलाने के नाम पर 1,034 करोड़ रुपये की अनियमितता की गई और इससे जुड़े पैसों के लेनदेन में कथित तौर पर संजय राउत की पत्नी और उनके सहयोगी शामिल हैं.

तिलक और सावरकर से की खुद की तुलना

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक और विनायक दामोदर सावरकर को भी इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ा था. संजय राउत द्वारा लिखे गए पत्र को बुधवार को ट्विटर पर साझा किया गया, जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘आप की तरह शिवसेना भी मेरी मां है. मुझ पर अपनी मां (पार्टी) से विश्वासघात करने का दबाव था. मुझे सरकार के खिलाफ नहीं बोलने और ऐसा नहीं करने पर कीमत चुकाने की धमकी दी जा रही थी. मैं इन धमकियों के आगे झुका नहीं, इस वजह से आज आपसे दूर हूं.


गिरफ्तारी के समय रो रही थीं मां

संजय राउत ने चिट्ठी में कहा कि उद्धव ठाकरे (शिवसेना के एक गुट के नेता) उनके अच्छे मित्र और नेता हैं और अगर मुश्किल समय में उनका साथ छोड़ा तो पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे को मुंह दिखाना मुश्किल होगा. उन्होंने अपनी मां को आश्वासन दिया कि वह निश्चित तौर पर जेल से बाहर आएंगे, क्योंकि महाराष्ट्र और देश की आत्मा की ‘हत्या’ नहीं की जा सकती. बता दें कि जब ईडी ने राउत को गिरफ्तार किया, तो उनकी मां ने उन्हें गले लगा लिया और जब एजेंसी उन्हें ले जा रही थी, तब वह सिसक रही थीं.

संजय राउत की मां से मिलने जाते हैं उद्धव

उधर, ईडी द्वारा संजय राउत के गिरफ्तार किए जाने के बाद उद्धव ठाकरे और उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे समय-समय पर राउत के प्रति समर्थन व्यक्त करने के लिए उनके परिवार से मिलने जाते हैं. संजय राउत केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली सरकार के कट्टर आलोचक रहे हैं और उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महा विकास आघाडी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.

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लोकतंत्र का फिर से होगा उदय

संजय राउत ने सत्तारूढ़ भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि एक शक्ति शिवसेना का खात्मा करना चाहती है और महाराष्ट्र के स्वाभिमान को रौंदना चाहती है. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मूकदर्शक और गुलाम जैसा रहना मुश्किल है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता रोहित पवार को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लेकिन इससे क्रांति होगी और लोकतंत्र का फिर से उदय होगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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