Sambhal 24 Kosi Parikrama: 46 साल बाद संभल में लौटी 24 कोसी परिक्रमा, कल्कि की नगरी के रूप में जगमगा रहा
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 25 Oct 2025 9:29 PM
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ
Sambhal 24 Kosi Parikrama: उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में 46 साल बाद धार्मिक आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. शुक्रवार रात 2 बजे लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संभल की पौराणिक 24 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ हुआ. यह परिक्रमा 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुक गई थी, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से फिर से प्रारंभ किया गया है.
Sambhal 24 Kosi Parikrama: शंखनाद, भजन और जयघोषों के बीच प्रारंभ हुई यह परिक्रमा बेनीपुरचक स्थित श्रीवंशगोपाल तीर्थ से शुरू होकर भुवनेश्वर, क्षेमनाथ और चंदेश्वर तीर्थों से होते हुए पुनः वंशगोपाल तीर्थ पर समाप्त होगी. परिक्रमा मार्ग में स्थित 87 देवतीर्थों और 19 प्राचीन कूपों का दर्शन कर श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस परिक्रमा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
1978 के बाद बदला संभल का चेहरा
दशकों पहले दंगों, अवैध कब्जों और पलायन की घटनाओं ने संभल की पहचान को धूमिल कर दिया था. लेकिन 2017 के बाद योगी सरकार ने जिले की स्थिति बदलने के लिए कई ठोस कदम उठाए. प्रशासनिक सख्ती और न्यायिक कार्रवाई के बाद अवैध कब्जों से 68.94 हेक्टेयर भूमि को मुक्त कराया गया. धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण हटाने के तहत 37 स्थलों को मुक्त कराया गया, जिनमें कुछ मस्जिदें, मजारें, कब्रिस्तान और मदरसे भी शामिल थे. इसके साथ ही 68 पौराणिक तीर्थस्थलों और 19 कूपों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की
गई है. कल्कि अवतार मंदिर समेत कई प्राचीन स्थलों पर पुनरुद्धार कार्य जारी है.
कानून-व्यवस्था और विकास में भी संभल आगे
योगी सरकार के कार्यकाल में संभल में 2 नए थाने और 45 नई चौकियां स्थापित की गईं. संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी व्यवस्था लागू की गई. अपराध नियंत्रण और बिजली चोरी पर सख्ती के चलते लाइन लॉस 82% से घटकर 18% तक आ गया है, जिससे करीब 84 करोड़ रुपये की बचत हुई है.
आर्थिक मोर्चे पर भी संभल ने लगाई बड़ी छलांग
आर्थिक मोर्चे पर भी संभल ने बड़ी छलांग लगाई है. 2405 करोड़ के निर्यात के साथ जिले ने प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया है. ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत यहां के मेटैलिक, वुडन और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं.
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर कदम
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दशकों बाद पहली बार संभल में आस्था और सुरक्षा का संतुलित वातावरण बना है. कभी दंगों और अविश्वास की छाया में खो चुका यह शहर अब फिर से अपने आध्यात्मिक स्वरूप और सांस्कृतिक धरोहर के साथ लौट रहा है. योगी सरकार के इन प्रयासों ने न केवल एक पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया है, बल्कि संभल की ऐतिहासिक पहचान को भी नई चमक दी है. ‘भगवान कल्कि की नगरी’ अब सचमुच जगमगा उठी है.
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By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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