सोमनाथ की आत्मकथा अभी नहीं छपेगी, जानिये क्यों पीछे हटे इसरो के अध्यक्ष

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 05 Nov 2023 1:21 PM

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ISRO chief S Somnath - इसरो (ISRO) के अध्यक्ष ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रमुख पदों पर आसीन शख्स को कई चुनौतियों से गुजरना पड़ता है. ये कुछ ऐसी चुनौतिययां हैं जिनसे हर किसी को गुजरना पड़ता है.

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ISRO chief S Somnath – इसरो (ISRO) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ (S Somanath) एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वे किसी अन्य कारण से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. दरअसल, खबर है कि फिलहाल वह अपनी आत्मकथा नहीं छपवाने जा रहे हैं. अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस ने इस बाबत खबर प्रकाशित की है. खबरों में बताया गया है कि सोमनाथ ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में कथित तौर पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. सिवन को लेकर तमाम दावे किए थे. इसपर बवाल हो गया था. यही वजह है कि सोमनाथ ने उक्त फैसला लिया है. सोमनाथ की ओर से पुष्टि की गई है कि उन्होंने विवाद को देखते हुए Nilavu Kudicha Simhangal’ (loosely translated as Lions that drank the moonlight) पुस्तक का प्रकाशन वापस लेने का फैसला किया है.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सोमनाथ ने कहा कि हां, मैंने प्रकाशन और रिलीज रोक लगाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आत्मकथा में किसी को जानबूझकर निशाने पर नहीं लिया है. उनकी आत्मकथा लोगों को नई राह दिखाती है साथ ही प्रेरणा देती है. उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था. इसरो (ISRO) के अध्यक्ष ने कहा कि प्रमुख पदों पर आसीन शख्स को कई चुनौतियों से गुजरना पड़ता है. ये ऐसी चुनौतिययां हैं जिनसे हर किसी को गुजरना पड़ता है.

किसी विशेष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया: सोमनाथ

एस. सोमनाथ ने कहा कि मैंने बस उस विशेष बिंदु को सामने लाने का प्रयास किया. मैंने किसी विशेष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया. बातचीत के दौरान सोमनाथ ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पुस्तक में चंद्रयान-2 मिशन की विफलता की घोषणा के संबंध में स्पष्टता की कमी का उल्लेख किया है. इसरो अध्यक्ष ने दोहराया कि उनकी आत्मकथा उन लोगों को प्रेरित करने की कोशिश है जो जीवन में चुनौतियों और बाधाओं से लड़कर कुछ हासिल करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि किताब में किसी की आलोचना नहीं है और न ही वे ऐसा करना चाहेंगे.

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डॉक्टर बनना चाहते थे सोमनाथ

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के डॉ एमजीआर यूनिवर्सिटी में कुछ दिन पहले डॉक्टरों की एक सभा को संबोधित करते हुए इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बताया था कि कैसे वह बचपन से डॉक्टर से बनना चाहते थे. मगर उनके पिता के कारण उन्हें इंजीनियरिंग चुननी पड़ी थी. एस सोमनाथ ने अपनी पढ़ाई-लिखाई के दिनों को याद करते हुए कहा कि अपने गृह राज्य केरल में मैं बायोलॉजी में टॉपर था और डॉक्टर बनने की इच्छा रखता था. हालांकि, मेरे पेशे से शिक्षक पिता ने मुझे इंजीनियरिंग या गणित लेने के लिए कहा, क्योंकि मेडिकल पेशा बहुत कठिन और अपेक्षा वाला है. उन्होंने आगे कहा, मेरे पिता का कहना था कि इंजीनियरिंग या गणित लेने से मुझे एक शिक्षक या प्रोफेसर के रूप में आसान जिंदगी जीने में मदद मिलेगी.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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