Rashtriya Gokul Mission: झारखंड में राष्ट्रीय गोकुल मिशन से पशुधन विकास को मिला बढ़ावा

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 20 Aug 2025 8:11 PM

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देशी नस्लों के संरक्षण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू "राष्ट्रीय गोकुल मिशन"(आरजीएम) ने झारखंड में भी पशुधन क्षेत्र को नयी गति दी है. राज्य के लाखों किसानों को इस योजना का सीधा लाभ मिल रहा है.

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Rashtriya Gokul Mission: देशी नस्लों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से लागू राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) का लाभ झारखंड के किसानों को भी मिल रहा है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य में पशुधन सुधार और रोग नियंत्रण से जुड़ी कई पहलें की गई हैं. पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अनुसार, झारखंड में अब तक 26.87 लाख पशु इस योजना में शामिल किए गए है. 36.06 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं और 18.20 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं. इस योजना से झारखंड में खास तौर पर केवल मादा बछड़ों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया गया. ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ तकनीक से अब तक 5,635 कृत्रिम गर्भाधान हो चुके हैं.1,068 मैत्री तकनीशियन को प्रशिक्षित कर गांव-गांव में कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. यह तकनीक 90 फीसदी तक मादा बछड़ों का जन्म सुनिश्चित करने वाली तकनीक है. इससे दूध उत्पादन बढ़ता है और आवारा पशुओं की संख्या कम होती है.  

एक लाख से ज्यादा पशुओं का किया गया उपचार 


इसके साथ ही पशुधन स्वास्थ्य रोग नियंत्रण कार्यक्रम  के तहत राज्य में जुलाई 2025 तक 24.23 लाख खुरपका-मुंहपका( एफएमडी), 57.94 लाख एलएसडी, 15,580 ब्रुसेलोसिस, 4,113 सीएसएफ और 52,370 पीपीआर टीकाकरण किए गए हैं. झारखंड में 236 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां सक्रिय हैं, जिनसे अब तक 66,525 किसान लाभान्वित हुए और 1,01,907 पशुओं का उपचार किया गया है. केंद्रीय राज्य मंत्री (मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी) प्रो. एस.पी. सिंह बघेल के मुताबिक सरकार का लक्ष्य झारखंड समेत पूरे देश में देशी नस्लों के संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग से पशुधन विकास को नई ऊंचाई पर ले जाना है.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन(आरजीएम) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे दिसंबर 2014 में शुरू किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य देशी नस्लों की गायों और भैंसों का संरक्षण और संवर्धन, दूध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि, किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और देशी नस्लों की जेनेटिक (आनुवंशिक) गुणवत्ता सुधारना है. यह योजना पूरे देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से चलाई जा रही है.

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