Emergency: 'बीमार मां से आखिरी बार नहीं मिल पाया, कांग्रेस ने दिया गहरा घाव', आपातकाल को यादकर भावुक हुए राजनाथ
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 11 Apr 2024 6:55 PM
Rajnath-Singh
Emergency: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1975 के आपातकाल की अनकही कहानी का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्हें दो साल के लिए जेल में रखा गया था और मां के निधन पर पेरोल भी नहीं दी गई थी.
Emergency: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में 1975 के आपातकाल की अनकही कहानी का खुलासा करते हुए कहा, आपातकाल के दौरान मुझे अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल नहीं दी गई थी. उन्होंने हमला करते हुए कहा, कांग्रेस हमें तानाशाह कहती है, कभी अपने गिरेबान पर झांककर नहीं देखा.
23 से 24 साल की उम्र में इमरजेंसी के दौरान जेल गए थे राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, मैं जिस समय जेल गया था, उस समय मेरी उम्र 23 से 24 साल रही होगी. 18 महीने मैं जेल में रहा. उन्हें 18 महीने के लिए जेल में इसलिए डाला गया, क्योंकि उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था. मैं उस समय शिक्षक के रूप में जेपी आंदोलन में शामिल हुआ था. हमलोग इमरजेंसी को लेकर आंदोलन करते थे, लोगों को जागरुक करते थे. लोगों को हमलोग बताते थे कि किस तरह से इमरजेंसी हमारे लिए घातक है. तानाशाह की परिचायक है, इसको हमलोग बताते थे.
इमरजेंसी के दौरान मां ने कहा था, चाहे जो हो जाए माफी मांगकर वापस मत आना : राजनाथ सिंह
नयी-नयी शादी हुई थी और राजनाथ सिंह को जाना पड़ा था जेल
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, जिन लोगों ने तानाशाही दिखाते हुए देश में इमरजेंसी थोपी, वे लोग हमलोगों को पर तानाशाही का आरोप लगाते हैं. राजनाथ सिंह से पूछा गया कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो पूरे परिवार में हलचल मच गई होगी, तो उन्होंने कहा, कोई हलचल नहीं मची. मेरी नयी-नयी शादी हुई थी. मैं बाहर से काम कर लौटा ही था कि मुझे बताया गया कि पुलिस आई हुई है. मैंने उन्हें आदर सहित घर पर बुलाया और चाय पिलायी. आराम से स्नान करके उनके साथ गाड़ी में बैठकर चला गया. रात करीब 11 बजे हमलोगों को जेल भेज दिया गया. करीब ढाई महीने हम तीन लोगों को बिल्कुल अकेला रखा गया था. जेल के अंदर मैं जब इमरजेंसी के खिलाफ नारा लगाता था, तो दूसरे कंपाउंड में मौजूद लोग भी मेरे पीछे नारा लगाते थे. इमरजेंसी के दौरान बहुत सारे नेताओं को गिरफ्तार किया गया था.
इमरजेंसी के दौरान जेल में राजनाथ सिंह को मिलती थी ऐसी यातनाएं
राजनाथ सिंह ने इमरजेंसी के दौरान जेल के अंदर की कहानी सुनाई और बताया कि जब उन्हें अकेले रखा गया था, तो उन्हें कौन-कौन सुविधाएं दी जाती थीं. उन्होंने बताया, पढ़ने के लिए किताबें नहीं दी जाती थी. पीतल के तसले में दाल दी जाती थी और हाथ पर रोटी. कुछ दिन के बाद मुझे नैनी जेल ट्रांसफर कर दिया गया.
मां ने कहा था, चाहे जो हो जाए माफी मांगकर वापस मत आना : राजनाथ
राजनाथ सिंह ने इमरजेंसी के दौर की कहानी सुनाते हुए कहा, जब मुझे भारी सुरक्षा के बीच नैनी जेल ले जाया जा रहा था, तब मुझसे मेरी मां ने कहा था कि चाहे जो भी हो जाए, माफी मांगकर वापस मत आना. मां की बात को सुनकर वहां मौजूद पुलिसवाले भी रोने लगे थे. इमरजेंसी के दौरान राजनाथ सिंह जब जेल में बंद थे, तो उसी समय उनकी माता जी का निधन हो गया था. रक्षा मंत्री ने बताया, मेरी मां ने मेरे चचेरे भाई से पूछा कि मैं जेल से बाहर कब बाहर आऊंगा? तो मेरे भाई ने जैसे ही उन्हें बताया कि मेरी जेल की सजा को एक साथ के लिए और बढ़ा दिया गया है. यह सुनते ही उनकी माता जी की तबियत बिगड़ गई और निधन हो गया. ब्रेन हैम्ब्रेज के कारण उनका निधन हुआ.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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