क्या बंद होंगी फ्री वाली सरकारी योजनाएं? सुप्रीम कोर्ट ने लगायी फटकार
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 Feb 2026 12:58 PM
सुप्रीम कोर्ट (Photo: PTI)
Freebies : सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त योजनाएं बांटने पर कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि इससे सरकारी खजाने पर बुरा असर पड़ता है. नीचे पढ़ें कोर्ट ने और क्या कहा.
Freebies : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई. पीठ ने पूछा कि बिजली शुल्क अधिसूचित होने के बाद तमिलनाडु की कंपनी ने अचानक जेब ढीली करने का फैसला क्यों किया. कोर्ट ने राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नि:शुल्क सेवा संस्कृति की कड़ी आलोचना की. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह विकास में बाधा डालती है.
मुफ्त योजनाएं क्यों दी जा रही हैं, कोर्ट का सवाल
कोर्ट ने कहा कि केवल फ्रीबीज बांटने के बजाय पार्टियों को ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो लोगों की जिंदगी बेहतर करें, जैसे बेरोजगारी दूर करने की योजनाएं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह संसाधन बांटने से देश के आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य पहले से घाटे में चल रहे हैं, तो फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों दी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सालाना आय का 25 प्रतिशत विकास कार्यों में क्यों नहीं लगाया जाता.
सरकारें बजट में स्पष्ट प्रस्ताव और खर्च का कारण बताएं : सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने साफ किया कि यह मामला किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि सभी राज्यों का है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सरकारें बजट में स्पष्ट प्रस्ताव और खर्च का कारण बताएं. पीठ ने कहा कि राज्य विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करते हैं- वेतन देना और इस तरह की मुफ्त सुविधाएं बांटना.
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रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए सरकार को : सुप्रीम कोर्ट
द्रमुक सरकार की मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने कहा कि राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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